IIFL Finance ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे जारी कर दिए हैं, और ये नतीजे उम्मीदों से कहीं बेहतर आए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 214.22% बढ़कर ₹1,816.70 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, पिछले साल की तुलना में कुल आय (Total Income) में 30.64% की वृद्धि देखी गई और यह ₹13,373.83 करोड़ रही।
सबसे खास बात यह है कि कंपनी का स्टैंडअलोन बिजनेस, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹409.57 करोड़ के नेट लॉस में था, अब ₹1,153.52 करोड़ के जोरदार मुनाफे में आ गया है। इस अवधि के लिए स्टैंडअलोन टोटल इनकम ₹7,467.11 करोड़ दर्ज की गई।
अगर चौथी तिमाही (Q4 FY26) की बात करें, तो कंसोलिडेटेड टोटल इनकम में 42.60% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹3,699.67 करोड़ रही, जबकि नेट प्रॉफिट ₹623.26 करोड़ दर्ज किया गया।
नतीजों का महत्व
यह मजबूत वित्तीय वापसी IIFL Finance के रेगुलेटरी चुनौतियों से उबरने और लाभप्रदता की ओर लौटने का संकेत देती है। स्टैंडअलोन प्रॉफिटेबिलिटी में वापसी मुख्य सकारात्मक पहलू है, जो कंपनी की कोर लेंडिंग गतिविधियों में बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रिस्क मैनेजमेंट को दर्शाता है।
लोन एसेट्स (Loan Assets) में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, जो ₹55,364.26 करोड़ से बढ़कर ₹70,911.07 करोड़ हो गई है। यह कंपनी की बढ़ती मार्केट प्रेजेंस को दिखाता है।
बैकग्राउंड: रेगुलेटरी और टैक्स चुनौतियाँ
हाल के दिनों में IIFL Finance को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। March 2024 में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने सुपरवाइजरी चिंताओं के चलते गोल्ड लोन (Gold Loan) बांटने पर रोक लगा दी थी। यह बैन September 2024 तक चला, जिसके लिए सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी और इसके चलते गोल्ड लोन पोर्टफोलियो और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भारी गिरावट आई।
इसके अलावा, January 2025 में इनकम टैक्स (I-T) डिपार्टमेंट ने टैक्स चोरी के आरोपों को लेकर IIFL Finance के ठिकानों पर सर्च भी की थी। कंपनी ने अधिकारियों के साथ सहयोग की पुष्टि की थी।
फाइनेंशियल ईयर 2025 में, कंपनी ने भारी प्रोविजन्स और पिछली समस्याओं के असर के कारण ₹409.57 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया था।
शेयरधारकों के लिए आउटलुक
शेयरधारक अब काफी बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और एक पुनर्जीवित स्टैंडअलोन बिजनेस वाली कंपनी की उम्मीद कर सकते हैं। लोन में हुई भारी वृद्धि और स्टैंडअलोन लॉस से वापसी एक मजबूत अर्निंग पाथ का संकेत देते हैं।
हालांकि, निवेशकों को बढ़े हुए बॉरोइंग्स (Borrowings) को मैनेज करने की कंपनी की स्ट्रैटेजी और एसेट क्वालिटी री-असेसमेंट के असर पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
मुख्य जोखिम और चिंताएं
कंसोलिडेटेड बॉरोइंग्स, डेट सिक्योरिटीज को छोड़कर, 38.77% बढ़कर ₹43,098.95 करोड़ हो गई है, जो बढ़े हुए लीवरेज को दर्शाता है।
कंपनी ने FY25 के लिए अपने ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) को ₹645.85 करोड़ तक ऊपर रिवाइज किया। NHB की सलाहों के अनुरूप अकाउंटिंग पॉलिसी में बदलाव से यह एडजस्टमेंट हुआ है, जो एसेट क्वालिटी की संभावित चिंताओं का संकेत देता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की 2025 की शुरुआत में हुई सर्च के बाद IIFL Finance ने ₹1.47 करोड़ का टैक्स भुगतान किया।
पीयर परफॉर्मेंस तुलना
IIFL Finance, Bajaj Finance, Muthoot Finance, और Manappuram Finance जैसे खिलाड़ियों के साथ एक प्रतिस्पर्धी बाजार में काम करती है। जहां Bajaj Finance एक डायवर्सिफाइड कंपनी है, वहीं Muthoot और Manappuram गोल्ड लोन सेगमेंट में सीधे प्रतिस्पर्धी हैं। IIFL द्वारा बताई गई 214% की साल-दर-साल प्रॉफिट ग्रोथ, खासकर पिछले साल के स्टैंडअलोन लॉस को देखते हुए, एक मजबूत रिकवरी को दर्शाती है।
वित्तीय मेट्रिक्स
- कंसोलिडेटेड लोन (एसेट्स) FY26 में 28.1% बढ़कर ₹70,911.07 करोड़ हुए।
- कंसोलिडेटेड बॉरोइंग्स FY26 में 38.77% बढ़कर ₹43,098.95 करोड़ हुए।
निवेशकों के लिए अगले कदम
निवेशक बढ़े हुए बॉरोइंग लेवल को मैनेज करने और नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर उनके प्रभाव पर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखेंगे।
- NPA री-असेसमेंट के प्रभाव सहित एसेट क्वालिटी ट्रेंड्स का विश्लेषण महत्वपूर्ण होगा।
- स्टैंडअलोन बिजनेस के निरंतर प्रदर्शन और समग्र लाभप्रदता में इसके योगदान पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- पिछली IT सर्च से उत्पन्न किसी भी लंबित टैक्स जांच या रेगुलेटरी मामलों पर अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।
- FY27 के लिए लोन ग्रोथ टारगेट, क्रेडिट कॉस्ट और लाभप्रदता पर फॉरवर्ड गाइडेंस अतिरिक्त अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।
