IDFC First Bank ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए ₹48,422.11 करोड़ का स्टैंडअलोन टोटल रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.26% की ग्रोथ दिखाता है। बैंक ने अपनी एसेट क्वालिटी में भी अच्छी खासी मजबूती दिखाई है। FY26 के अंत तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो गिरकर 1.61% पर आ गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में 1.87% था।
₹645 करोड़ के गबन ने डाला कमाई पर असर
जहां एक ओर रेवेन्यू और एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, वहीं बैंक के नतीजों में एक बड़ी चिंताजनक बात सामने आई है। IDFC First Bank को एक खास ब्रांच में ₹645.59 करोड़ की जमा राशि के गबन (embezzlement) के कारण एक बड़ा खर्च दर्ज करना पड़ा है। इस भारी भरकम अमाउंट का सीधा असर बैंक की FY26 की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ा है। फिलहाल, इस मामले की फॉरेंसिक जांच चल रही है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भी इसकी जांच की जा रही है।
बैंक की रणनीति और भविष्य की राह
IDFC First Bank पिछले दो सालों से अपने रिटेल डिपॉजिट बेस को लगातार बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य फंड की लागत को कम करना और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को बेहतर बनाना है। बैंक ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कस्टमर एक्सपीरियंस को बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आईटी सिस्टम में भी निवेश कर रहा है।
आगे क्या?
शेयरहोल्डर्स अब इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि गबन का यह मामला कितना एक बार की घटना (one-time event) थी। ब्रांच लेवल पर इंटरनल कंट्रोल्स को मजबूत करना बैंक के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। रिटेल लोन और डिपॉजिट में लगातार ग्रोथ से भविष्य में प्रॉफिटेबिलिटी को सहारा मिलने की उम्मीद है। एसेट क्वालिटी में सुधार से यह भी संकेत मिलता है कि बैंक का लोन पोर्टफोलियो मजबूत हो रहा है।
