IDBI Bank का साल भर का शानदार प्रदर्शन, तिमाही नतीजे मिले-जुले
IDBI Bank ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (Financial Year) के लिए मजबूत प्रदर्शन की घोषणा की है। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 26.59% बढ़कर ₹9,513.36 करोड़ दर्ज किया गया। इस सालाना वृद्धि में नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड (NSDL) IPO में बैंक की हिस्सेदारी बेचने से हुआ ₹1,706.91 करोड़ का महत्वपूर्ण लाभ शामिल है। FY26 के लिए कुल स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 5.67% बढ़कर ₹35,743.53 करोड़ रहा।
हालांकि, बैंक की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे कुछ नरम रहे। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 5.27% घटकर ₹1,943.17 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹2,051.18 करोड़ था। इसी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹2,007.12 करोड़ रहा, जबकि स्टैंडअलोन टोटल रेवेन्यू 4.14% बढ़कर ₹9,409.45 करोड़ पर पहुंचा।
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार जारी रहा, ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेश्यो साल-दर-साल 2.98% से घटकर 2.32% पर आ गया है। बैंक ने 99.39% के प्रोविजन कवरेज रेश्यो (Provision Coverage Ratio) को भी बनाए रखा।
बैंक वर्तमान में एक बड़े स्वामित्व परिवर्तन (ownership transition) के दौर से गुजर रहा है, जिसमें भारत सरकार और LIC अपनी 60% से अधिक हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इस प्राइवेटाइजेशन (privatization) का उद्देश्य बैंक में नई रणनीतिक दिशा और परिचालन दक्षता लाना है।
लेकिन, कुछ प्रमुख बिंदु निवेशकों को चिंतित कर सकते हैं। बैंक के उधार (Borrowings) में साल-दर-साल 41.10% की तेज वृद्धि देखी गई है, जो फंडिंग लागत और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) को प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, बैंक ने ₹2,121.82 करोड़ की अचल संपत्तियों (immovable properties) का एक बड़ा राइट-डाउन (write-down) दर्ज किया है। विश्लेषक (Analysts) इस कदम के दीर्घकालिक प्रभावों पर बारीकी से नजर रखेंगे। तिमाही नतीजों में एकमुश्त लाभ (one-time gains) जैसे NSDL IPO लाभ का प्रभाव, और गैर-प्रमुख मदों (non-core items) पर बढ़ती निर्भरता, बैंक के लिए लगातार मजबूत परिचालन प्रदर्शन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
IDBI Bank के प्रमुख पब्लिक सेक्टर समकक्षों (peers) में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) शामिल हैं। ये बैंक भी बदलते बैंकिंग परिदृश्य में अपनी एसेट क्वालिटी और लाभप्रदता में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
