HUDCO ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने प्रोविजनल नतीजे जारी किए हैं, और कंपनी की लेंडिंग (lending) एक्टिविटीज ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹1,27,952 करोड़ के मुकाबले, इस बार लोन सैंक्शन (loan sanctions) में 28.76% की बड़ी उछाल देखी गई है, जो ₹1,64,757 करोड़ तक पहुँच गया है। वहीं, लोन डिस्बर्समेंट (loan disbursements) में भी 27.87% का इज़ाफ़ा हुआ है, जो पिछले साल के ₹40,037 करोड़ से बढ़कर ₹51,194 करोड़ हो गया है।
यह मज़बूत प्रदर्शन हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट फाइनेंस की भारी डिमांड को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इसमें सरकारी पहलों (government initiatives) और आर्थिक गतिविधियों (economic activity) का अहम योगदान हो सकता है। कंपनी, जो 1970 में स्थापित हुई थी और अप्रैल 2024 में 'नवरत्न' (Navratna) स्टेटस हासिल कर चुकी है, भविष्य के लिए एक मज़बूत पाइपलाइन का संकेत दे रही है।
FY2024-25 में HUDCO ने रिकॉर्ड ₹1,27,952 करोड़ के लोन सैंक्शन और ₹40,038 करोड़ का डिस्बर्समेंट दर्ज किया था। FY26 के पहले नौ महीनों (दिसंबर 2025 तक) के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, सैंक्शन ₹1,39,151.92 करोड़ और डिस्बर्समेंट ₹41,346.70 करोड़ थे।
Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) की बात करें तो, HUDCO ने ₹630.23 करोड़ का नेट प्रॉफिट (net profit) दर्ज किया था, जो पिछले साल की तुलना में 13% ज़्यादा था। इस तिमाही में रेवेन्यू (revenue) 34.22% बढ़कर ₹2,937.31 करोड़ हो गया था, और डिस्बर्समेंट ₹12,812 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर थे।
निवेशकों के लिए, यह बढ़त भविष्य की रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये प्रोविजनल नतीजे हैं और ऑडिटेड (audited) आंकड़े अलग हो सकते हैं। निवेशकों को कंपनी की एसेट क्वालिटी (asset quality) और नेट प्रॉफिटेबिलिटी पर भी नज़र रखनी चाहिए।
भारतीय हाउसिंग फाइनेंस मार्केट में 15-16% CAGR से ग्रोथ की उम्मीद है, जो 2029-30 तक ₹77-81 ट्रिलियन तक पहुँच सकती है। HUDCO इस सेक्टर में LIC Housing Finance और PNB Housing Finance जैसे दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।