इस दोहरे फैसले से कंपनी ने एक तरफ जहां अपने शेयरधारकों को सीधा रिटर्न (Return) देने का वादा किया है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने की मंशा भी साफ कर दी है।
HUDCO बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹1.25 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड को मंजूरी दी है, जिसके लिए 28 मार्च, 2026 को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय की गई है।
इसके अलावा, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹70,000 करोड़ तक की अधिकतम सीमा वाली एक बड़ी बोरिंग योजना को भी अधिकृत किया है। यह कदम भविष्य की हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाने की HUDCO की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकारी स्वामित्व वाली HUDCO, जो 1970 से हाउसिंग और शहरी विकास का समर्थन कर रही है, ने लगातार डिविडेंड देने की अपनी परंपरा जारी रखी है। पहले ₹80,000 करोड़ तक के बोरिंग प्रोग्राम पर भी चर्चा हुई थी, जो कंपनी के विस्तार की योजनाओं को दर्शाता है।
हालांकि, यह बड़ा बोरिंग प्लान कंपनी पर कर्ज (Leverage) का दबाव बढ़ा सकता है। सितंबर 2025 तक समाप्त दूसरी तिमाही में HUDCO का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) बढ़कर 5.97x पर पहुंच गया था। कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पहली छमाही में 2.88% थे, लेकिन मैनेजमेंट दूसरी छमाही में इसे 3.1% से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
HUDCO, Power Finance Corporation (PFC) और REC Ltd. जैसे अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों के साथ काम करती है, जो बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं। Indian Railway Finance Corporation (IRFC) भी इसी क्षेत्र का एक अहम खिलाड़ी है।
जून 2025 को समाप्त तिमाही के लिए कंपनी की सेल्स में साल-दर-साल 34.22% की बढ़ोतरी देखी गई थी। अब निवेशकों की नजरें 2026-27 में ₹70,000 करोड़ के बोरिंग लिमिट के वास्तविक उपयोग और कंपनी द्वारा कर्ज प्रबंधन पर रहेंगी। NIMs में सुधार और प्रमुख आवास व इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में इसके योगदान पर भी नजर रखी जाएगी।
