HDFC Bank को मिली 'Strong' ESG रेटिंग
2 अप्रैल 2026 को HDFC Bank ने बताया कि उसे 'ESG Risk Assessments & Insights Limited' से 61 का ESG (Environmental, Social, and Governance) स्कोर मिला है। खास बात यह है कि बैंक ने इस एजेंसी से यह रेटिंग नहीं मांगी थी, बल्कि यह पूरी तरह से पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार की गई है। यह एजेंसी भारत की पहली ESG रेटिंग कंपनियों में से एक है और लगभग 1,000 इंडिकेटर्स पर कंपनियों का मूल्यांकन करती है।
ESG रेटिंग का महत्व
निवेशक आजकल कंपनियों की लंबी अवधि की स्थिरता (sustainability) और नैतिक प्रथाओं (ethical practices) का आकलन करने के लिए ESG रेटिंग को बहुत महत्व देते हैं। 61 का स्कोर आम तौर पर "Strong" कैटेगरी में आता है, जो स्टेकहोल्डर्स को बैंक के प्रदर्शन का एक ठोस मापक प्रदान करता है और निवेशक के विश्वास को बढ़ा सकता है।
HDFC Bank अपनी रणनीति में ESG सिद्धांतों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैंक का लक्ष्य FY 2031-32 तक कार्बन न्यूट्रल बनना है, जिसके लिए वह उत्सर्जन कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने जैसी पहल कर रहा है। इसके अलावा, बैंक ने ESG जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क भी बनाया है, जो लोन देने और क्रेडिट मूल्यांकन प्रक्रियाओं में ESG कारकों को एकीकृत करता है।
पिछली रेटिंग्स और पीयर कंपैरिजन
यह कोई पहली बार नहीं है जब HDFC Bank को ESG रेटिंग मिली हो। इससे पहले FY 2024 के लिए बैंक का स्कोर 70 था, और NSE Sustainability Ratings & Analytics Ltd. से इसे 73 का स्कोर मिला था, जिसने इसे 'Leader' कैटेगरी में रखा था।
अन्य प्रमुख भारतीय बैंकों की तुलना में, HDFC Bank का नया स्कोर 61 इसे "Strong" कैटेगरी में रखता है। वहीं, 2025 में ICICI Bank का स्कोर 69 और Kotak Mahindra Bank का स्कोर 67 था। State Bank of India का स्कोर 23 था, जबकि YES BANK ने 2025 में S&P Global CSA पर 79 का उच्च स्कोर प्राप्त किया था।
हालांकि यह अनचाही रेटिंग एक सकारात्मक संकेत है, बैंक को अतीत में कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है, जिसमें हाई-रिस्क बॉन्ड की गलत बिक्री के आरोप और पिछली ESG मूल्यांकनों के संबंध में नियामक दंड शामिल हैं। भविष्य की ESG रेटिंग बैंक द्वारा किसी भी शासन (governance) या ग्राहक-संबंधी चिंताओं को दूर करने के निरंतर प्रयासों को दर्शा सकती है।
