नतीजों पर एक नज़र
कंपनी के फाइनेंशल ईयर 2026 के नतीजों में, GIC Housing Finance का ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो पिछले साल के मुकाबले 7% बढ़कर ₹11,235 करोड़ पर पहुंच गया। इसी अवधि में, कंपनी की नेटवर्थ में भी 7% का उछाल देखा गया और यह ₹2,106 करोड़ हो गई।
हालांकि, मुनाफे (Profit) की बात करें तो कंपनी को 4% की गिरावट का सामना करना पड़ा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹154 करोड़ रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹160 करोड़ था।
इस मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) का बढ़ना है। FY26 के अंत तक, ग्रॉस NPAs बढ़कर 3.96% हो गए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 3.03% था। इसी के चलते, शेयर पर कमाई (Earnings Per Share - EPS) भी 4% घटकर ₹28.69 पर आ गई, जो FY25 में ₹29.74 थी।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
GIC Housing Finance के ये नतीजे एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। एक तरफ जहां कंपनी अपने लोन बुक और नेटवर्थ को बढ़ाने में कामयाब रही है, वहीं मुनाफे में गिरावट और NPAs का बढ़ना कंपनी की एसेट क्वालिटी (asset quality) और भविष्य की कमाई को लेकर सवाल खड़े करता है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के लिए यह दौर थोड़ा चुनौतीपूर्ण है। बढ़ती ब्याज दरें और इस सेक्टर में कॉम्पिटिशन (competition) के चलते कंपनियों को अपनी कॉस्ट (cost) और रिस्क मैनेजमेंट (risk management) पर खास ध्यान देना पड़ रहा है।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि कंपनी इन बढ़ते NPAs को कैसे नियंत्रित करती है और अपनी लोन बुक की क्वालिटी को कैसे बनाए रखती है।