पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, Fino Payments Bank का नेट प्रॉफिट 43.31% गिरकर ₹52.46 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में यह ₹92.53 करोड़ था। इसी दौरान, कुल आय में 14.03% की गिरावट दर्ज की गई।
इस तिमाही में, लेबर कोड्स के बाद कर्मचारी लाभ में हुए बदलावों के कारण ₹4.39 करोड़ का एक बड़ा वन-टाइम खर्च भी दर्ज किया गया।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बैंक का कर्ज लगभग दोगुना हो गया है, जिससे Debt-equity ratio 1.12 से बढ़कर 1.91 हो गया है। मार्च 2026 के अंत तक, नेट वर्थ बढ़कर ₹603.91 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹571.86 करोड़ था। बैंक के Return on Assets (Average) में भी बड़ी गिरावट आई है, जो FY26 में 1.10% रहा, जबकि FY25 में यह 2.43% था।
इन वित्तीय चिंताओं के बीच, एक और बड़ा झटका बैंक को तब लगा जब उसके मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, Rishi Gupta, को GST जांच के सिलसिले में 27 फरवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह जांच उनके डायरेक्ट कंप्लायंस से जुड़ी नहीं है, लेकिन इस घटना ने प्रबंधन और प्रतिष्ठा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, इन नकारात्मक खबरों के बीच एक अच्छी बात यह है कि RBI ने 5 दिसंबर, 2025 को बैंक को Small Finance Bank (SFB) में बदलने की सैद्धांतिक मंजूरी (in-principle approval) दे दी है। इस परिवर्तन से बैंक को अपनी सेवाओं का विस्तार करने और विकास के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है।
शेयरधारकों के लिए, यह स्थिति मिली-जुली है। SFB में बदलने की लंबी अवधि की संभावना तो है, लेकिन वर्तमान में घटता रेवेन्यू, गिरता मुनाफा, बढ़ता कर्ज और प्रबंधन से जुड़े जोखिम बड़ी चुनौतियां पेश कर रहे हैं। CEO की गिरफ्तारी ने नेतृत्व की स्थिरता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
