Fino Payments Bank: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! FY26 में ₹92.5 Cr मुनाफा, SFB बनने की ओर तेज़ कदम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fino Payments Bank: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! FY26 में ₹92.5 Cr मुनाफा, SFB बनने की ओर तेज़ कदम
Overview

Fino Payments Bank ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक ने **₹1,847.10 करोड़** की कुल इनकम पर **₹92.53 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस बीच, कंपनी स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की अपनी बड़ी योजना पर भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

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Fino Payments Bank के FY26 के नतीजे

Fino Payments Bank ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने शानदार नतीजे घोषित किए हैं। बैंक ने ₹1,847.10 करोड़ की कुल इनकम के मुकाबले ₹92.53 करोड़ का नेट प्रॉफिट हासिल किया है। ऑडिटर्स ने इन नतीजों पर एक क्लीन रिपोर्ट दी है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति को मज़बूती देती है।

इसी के साथ, बैंक ने लीडरशिप में निरंतरता बनाए रखते हुए, अनিন্দা मुखर्जी (Aninda Mukherjee) को चीफ रिस्क ऑफिसर (Chief Risk Officer) के पद पर अगले तीन साल के लिए फिर से नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 3 मई 2026 से प्रभावी होगी।

इस अवधि के नतीजों पर एक ₹4.4 करोड़ के एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) का भी असर पड़ा है, जो नए लेबर कोड्स (Labour Codes) से संबंधित है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की ओर अग्रसर

Fino Payments Bank अपनी रणनीतिक योजना के तहत स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) बनने की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। दिसंबर 2025 में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से बैंक को इस बदलाव के लिए 'इन-प्रिंसिपल' (In-principle) मंज़ूरी मिल चुकी है। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि SFB बनने के बाद Fino Payments Bank को लोन देने जैसी कई तरह की फाइनेंशियल सर्विसेज की पेशकश करने की अनुमति मिल जाएगी, जिससे ग्रोथ के नए रास्ते खुलेंगे।

Fino Payments Bank अपने 'फिजिटल' (Phygital - फिजिकल और डिजिटल का मिश्रण) मॉडल पर काम करता है। यह अपने विशाल मर्चेंट नेटवर्क का उपयोग करके मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी (semi-urban) इलाकों के ग्राहकों को सेवाएं देता है, और इसका ज़्यादातर रेवेन्यू (Revenue) फीस और कमीशन से आता है।

हालांकि, कंपनी के लीडरशिप को हाल ही में कुछ जांच का सामना करना पड़ा था। फरवरी 2026 के अंत में, इसके MD & CEO, ऋषि गुप्ता (Rishi Gupta) को GST चोरी की जांच के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें 26 मार्च 2026 को कुछ शर्तों के साथ ज़मानत मिल गई थी। उस समय बैंक ने कहा था कि उनका ऑपरेशनल कामकाज स्थिर रहा है और वे जांच में सहयोग कर रहे हैं।

जोखिम और गवर्नेंस

MD & CEO की पिछली गिरफ्तारी जैसी गवर्नेंस संबंधी घटनाओं को देखते हुए, कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) में सावधानी बनाए रखने की ज़रूरत बनी हुई है। नए लेबर रेगुलेशन से जुड़ा ₹4.4 करोड़ का एक्सेप्शनल आइटम सीधे तौर पर इस फाइनेंशियल ईयर के प्रॉफिट को प्रभावित करने वाला एक सीधा खर्च था।

प्रतिस्पर्धी माहौल

Fino Payments Bank, Airtel Payments Bank, India Post Payments Bank और Jio Payments Bank जैसे अन्य पेमेंट बैंकों के साथ एक प्रतिस्पर्धी बाज़ार में काम करता है। SFB में बदलने की इसकी योजना इसे मौजूदा स्मॉल फाइनेंस बैंकों के साथ सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगी।

वित्तीय मजबूती

31 मार्च 2026 तक, बैंक का ऑडिटेड कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 83.95% पर था, जो रेगुलेटरी ज़रूरतों से काफी ज़्यादा है।

भविष्य की राह

निवेशक कई प्रमुख क्षेत्रों पर नज़र रखेंगे:

  • स्मॉल फाइनेंस बैंक ट्रांज़िशन के अंतिम मंज़ूरी और पूरा होने की प्रगति और समय-सीमा।
  • FY27 में कंपनी का प्रदर्शन, खासकर नए SFB मॉडल के तहत खर्चों का प्रबंधन और रेवेन्यू ग्रोथ।
  • RBI के दिशानिर्देशों का पालन और किसी भी बचे हुए गवर्नेंस मामलों का प्रबंधन।
  • डिजिटल ट्रांजैक्शन (Digital Transactions) में वृद्धि और टेक्नोलॉजी-आधारित सेवाओं का योगदान।
  • बदलते ढांचे के तहत ग्राहकों और मर्चेंट बेस का अधिग्रहण और उन्हें बनाए रखना।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.