ऑडिटर की चेतावनी: क्या Dharani Finance के लिए मुश्किल है आगे का रास्ता?
Dharani Finance के ऑडिटर ने कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट पर एक संशोधित राय (modified opinion) जारी की है, जिसमें गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (going concern) यानी भविष्य में अपना कामकाज जारी रखने की क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही (Q4 FY26) में ₹13.22 लाख का मुनाफा दर्ज किया, जबकि कुल आय ₹34.26 लाख रही। पूरे फाइनेंशियल ईयर FY26 के लिए, कंपनी का नेट प्रॉफिट (net profit) ₹55.46 लाख रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर FY25 के ₹83.79 लाख के मुनाफे से कम है।
हालांकि, इन नंबर्स के बीच ऑडिटर की चेतावनी अहम है। मुख्य मुद्दे ये हैं:
- RBI के न्यूनतम पूंजी नियम: Dharani Finance, जो एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है, RBI द्वारा निर्धारित न्यूनतम पूंजी (minimum capital) की ज़रूरतों को पूरा करने में विफल रही है। कंपनी के नेट ओन्ड फंड्स (net owned funds) आवश्यक सीमा से नीचे आ गए हैं।
- ₹200 लाख का फंसा डिपॉजिट: साल 2017 में किया गया ₹200 लाख का एक इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट (inter-corporate deposit) है, जिससे अब तक कोई ब्याज (interest) नहीं मिला है। चालू फाइनेंशियल ईयर में भी इस पर कोई ब्याज दर्ज नहीं किया गया है, जिससे कंपनी की एसेट क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं।
ऑडिटर की संशोधित राय (modified opinion) एक बड़ा रेड फ्लैग है। RBI के नियमों का पालन न करने पर केंद्रीय बैंक की ओर से कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें भारी जुर्माना या कंपनी के कामकाज पर पाबंदी भी शामिल है। Dharani Finance पर RBI का दबाव बढ़ सकता है और उसे अपनी न्यूनतम फंड ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत कैपिटल (capital) जुटाने की ज़रूरत पड़ सकती है। अगर 'गोइंग कंसर्न' का संदेह सच साबित होता है, तो कंपनी के ऑपरेशन्स (operations) गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। शेयरधारक ₹200 लाख के डिपॉजिट की वापसी को लेकर भी चिंतित रहेंगे।
इस बीच, FY26 में कंपनी की 'Other Equity' बढ़कर ₹503.41 लाख हो गई, जो FY25 में ₹448.63 लाख थी।
बाजार में Muthoot Finance, Manappuram Finance और Cholamandalam Investment and Finance Company Ltd. जैसी बड़ी NBFCs आमतौर पर मज़बूत रेगुलेटरी निगरानी, स्वस्थ फाइनेंसियल स्थिति और कुशल रिस्क मैनेजमेंट के साथ काम करती हैं, और वे इस तरह के 'गोइंग कंसर्न' संदेह से बची रहती हैं।
निवेशक और स्टेकहोल्डर्स अब RBI के अगले कदमों, मैनेजमेंट द्वारा कैपिटल की कमी को दूर करने की योजनाओं और ऑडिटर की अगली रिपोर्ट पर बारीकी से नज़र रखेंगे।