डील का पूरा गणित
इस बड़े बदलाव के पीछे की वजह एक शेयर परचेज एग्रीमेंट (Share Purchase Agreement) और एक प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) है। शेयर परचेज एग्रीमेंट के तहत 13.83% इक्विटी ₹4.12 करोड़ में खरीदी जाएगी। वहीं, 55.11% इक्विटी ₹20 करोड़ के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट से ली जाएगी। इन दोनों सौदों को मिलाकर, नए एक्वायरर्स (Acquirers) और उनके पर्सन्स एक्टिंग इन कॉन्सर्ट (PACs) के पास कंपनी की कुल 68.94% हिस्सेदारी हो जाएगी। इसके बाद, मौजूदा प्रमोटर्स को 'पब्लिक कैटेगरी' में डाल दिया जाएगा और नए ग्रुप के हाथ में कंपनी की बागडोर आ जाएगी।
छोटे निवेशकों के लिए मौका
इस मालिकाना हक में बड़े बदलाव से माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स (Minority Shareholders) को एक अच्छा मौका मिल रहा है। वे ₹2.50 प्रति शेयर के ऑफर प्राइस पर अपने शेयर बेचकर बाहर निकल सकते हैं। उम्मीद है कि नए नेतृत्व के तहत कंपनी की रणनीति में भी बदलाव आ सकता है।
जोखिम और आगे का रास्ता
यह ध्यान रखना अहम है कि ऑफर के मैनेजर ने कहा है कि उन्होंने Cubical Financial Services Ltd से जुड़ी जानकारी को स्वतंत्र रूप से वेरिफाई नहीं किया है। इसके अलावा, यदि नए एक्वायरर की हिस्सेदारी 75% से ऊपर चली जाती है, तो मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
कंपनी का सेक्टर
Cubical Financial Services स्टॉक ब्रोकिंग (Stock Broking) और फाइनेंशियल एडवाइजरी (Financial Advisory) सेक्टर में काम करती है। यह Arihant Capital Markets Ltd और SMC Global Securities Ltd जैसी कंपनियों के समान सेक्टर में है। छोटी कंपनी होने के नाते, इसके संचालन में मालिकाना हक और कंट्रोल में होने वाले बदलावों का असर बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा देखा जा सकता है।