Q4 में ₹1625 करोड़ का मुनाफा
Cholamandalam Financial Holdings Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर और चौथे क्वार्टर के नतीजे जारी किए हैं। चौथे क्वार्टर (Q4 FY26) के लिए, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू साल-दर-साल 16.76% बढ़कर ₹10,519.50 करोड़ रहा। इसी अवधि में, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹1,625.55 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹36.59 रहा।
पूरे साल की ग्रोथ शानदार
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए, Cholamandalam का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹39,575.77 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल के ₹33,459.92 करोड़ की तुलना में 18.28% की बढ़ोतरी है। वहीं, FY26 में कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹5,485.18 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹4,739.88 करोड़ से 15.72% ज्यादा है। पूरे साल का कंसोलिडेटेड ईपीएस ₹130.01 रहा।
निवेशकों के लिए डिविडेंड का ऐलान
कंपनी ने अपने शेयरधारकों को खुश करते हुए 130% का फाइनल डिविडेंड (₹1.30 प्रति शेयर) देने की सिफारिश की है। यह शेयरधारकों को रिटर्न देने के प्रति कंपनी के विश्वास को दर्शाता है।
बढ़ी चुनौतियां: ₹200 करोड़ का प्रोविजन और बढ़ता खर्च
नतीजों के साथ-साथ, कंपनी कुछ चुनौतियों का भी सामना कर रही है। Cholamandalam ने भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए ₹200 करोड़ का प्रोविजन (मैनेजमेंट ओवरले) अलग रखा है। इसके अलावा, नए लेबर कोड लागू होने के कारण कर्मचारियों के खर्चों में भी वृद्धि हुई है, जिससे ऑपरेटिंग कॉस्ट पर दबाव बढ़ा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड बोरिंग्स भी पिछले साल के ₹133,791.98 करोड़ से बढ़कर ₹156,542.80 करोड़ हो गया है, जो विस्तार या वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया गया है।
कंपनी का बैकग्राउंड और निवेश पर असर
Cholamandalam Financial Holdings, मुरूगप्पा ग्रुप (Murugappa Group) का एक अहम हिस्सा है। यह कंपनी जनरल इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, एनबीएफसी (NBFC) लेंडिंग और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी वित्तीय सेवाएं प्रदान करती है। नए सीएफओ (CFO) वी. आनंद के नेतृत्व में, कंपनी अपने बढ़ते लोन पोर्टफोलियो और जोखिमों को मैनेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
निवेशक क्या देख रहे हैं?
निवेशक कंपनी के लोन पोर्टफोलियो के प्रदर्शन, खासकर बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच उसकी मजबूती पर बारीकी से नजर रखेंगे। यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपने बढ़े हुए बोरिंग्स और कर्मचारियों के बढ़ते खर्चों को कैसे मैनेज करती है। साथ ही, एनबीएफसी सेक्टर के भविष्य के आउटलुक पर मैनेजमेंट की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण होगी।
