Q4 में भी दिखा दमदार प्रदर्शन, एसेट क्वालिटी में सुधार
चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा। इस दौरान नेट प्रॉफिट ₹1,645.20 करोड़ रहा, जबकि कुल आय ₹8,563.54 करोड़ दर्ज की गई।
कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार देखने को मिला है। मार्च 2026 तक स्टेज 3 (90+ दिन) के अटके हुए लोन 3.05% पर आ गए हैं, जो पिछले क्वार्टर के 3.36% से कम है। इन नतीजों को देखते हुए बोर्ड ने ₹0.70 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों के लिए एक अच्छी खबर है।
भविष्य की चुनौतियों के लिए ₹200 करोड़ का बफर, बढ़ा कर्मचारी खर्च
Cholamandalam Investment ने भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए, खासकर भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) को ध्यान में रखते हुए, ₹200 करोड़ का एक प्रोविजन (allowance) रखा है। वहीं, नए लेबर कोड्स की वजह से कर्मचारी लाभों (employee benefit expenses) पर ₹49.65 करोड़ का अतिरिक्त खर्च बढ़ा है, जो परिचालन लागत (operational costs) को प्रभावित करेगा।
डाइवर्सिफिकेशन से कंपनी को मिलेगी मजबूती
मुरुगप्पा ग्रुप (Murugappa Group) का हिस्सा Chola, सिर्फ गाड़ियों के फाइनेंस तक ही सीमित नहीं है। कंपनी होम लोन, प्रॉपर्टी पर लोन (loan against property) और SME लेंडिंग जैसे दूसरे क्षेत्रों में भी अपना कारोबार तेजी से बढ़ा रही है। इस डाइवर्सिफिकेशन (diversification) का मकसद किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और ग्रोथ के नए अवसर तलाशना है।
प्रतिस्पर्धियों को कड़ी टक्कर
बाजार में Chola का मुकाबला Shriram Finance, Bajaj Finance और Mahindra Finance जैसी बड़ी कंपनियों से है। Chola अपनी डाइवर्सिफाइड लेंडिंग बुक के जरिए एक संतुलित ग्रोथ हासिल करने और प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या देखना होगा?
कंपनी की कंसोलिडेटेड एसेट्स (Assets) ₹2,01,886.76 करोड़ से बढ़कर ₹2,45,448.23 करोड़ हो गई हैं। आगे निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी ₹200 करोड़ के रिस्क बफर का प्रबंधन कैसे करती है, नए लेबर कोड्स के चलते बढ़े कर्मचारी खर्च का मुनाफे पर क्या असर होता है, और एसेट क्वालिटी व डाइवर्सिफाइड लेंडिंग सेगमेंट में कंपनी की प्रगति कैसी रहती है।
