हाल ही में, "Central Bank of India" ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपनी सिक्योरिटी कवर सर्टिफिकेट (Security Cover Certificate) जमा की है। इस फाइलिंग के माध्यम से बैंक ने पुष्टि की है कि उसके लिस्टेड अनसिक्योर्ड डेट सिक्योरिटीज (listed unsecured debt securities) पर कोई खास संपत्तियां गिरवी (pledged) नहीं हैं, यानी ये अनसिक्योर्ड ही रहेंगे। SEBI के नियमों के तहत यह एक नियमित डिस्क्लोजर (disclosure) है, जो डिबेंचर ट्रस्टियों (debenture trustees) और स्टॉक एक्सचेंजों को इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) की स्थिति से अवगत कराता है।
यह स्पष्टीकरण उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो इन सिक्योरिटीज (securities) में निवेशित हैं। अनसिक्योर्ड होने का मतलब है कि किसी भी डिफॉल्ट (default) की स्थिति में, बॉन्डहोल्डर्स (bondholders) का क्लेम (claim) सिक्योर लेंडर्स (secured lenders) के बाद आएगा। इससे संभावित रिकवरी (recovery) की राशि प्रभावित हो सकती है, और निवेशकों का जोखिम बढ़ जाता है।
"Central Bank of India" जैसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक अपने बिजनेस ऑपरेशंस (business operations) और कैपिटल (capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (non-convertible debentures) जैसे विभिन्न माध्यमों से फंड जुटाते हैं। इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स की सिक्योरिटी स्टेटस (security status) के बारे में पारदर्शी जानकारी देना निवेशकों के हित में है। "Central Bank of India" के अलावा State Bank of India, Punjab National Bank और Bank of Baroda जैसे अन्य बड़े बैंक भी SEBI के नियमों का पालन करते हुए इसी तरह के डिस्क्लोजर (disclosures) जारी करते हैं।
