नतीजों पर एक नजर: क्या रहा खास?
बैंक ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी पेश किए, जिसमें ₹298.92 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 16.3% ज्यादा था। इस तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट ₹40.08 करोड़ रहा।
पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, बैंक के टोटल रेवेन्यू में 15.32% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹1,146.87 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, पूरे साल का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹131.65 करोड़ से बढ़कर ₹141.39 करोड़ हुआ, जो 7.40% की ग्रोथ दर्शाता है।
बिजनेस बढ़ा, पर खर्चों ने लगाया लगाम
बैंक के डिपॉजिट्स और एडवांसेस (ग्राहकों को दिए गए लोन) दोनों में 20% से ज्यादा की तगड़ी ग्रोथ दर्ज की गई है, जो बैंक के बिजनेस के मजबूत विस्तार का संकेत है। इस बिजनेस ग्रोथ के बावजूद, प्रॉफिट में उतनी तेजी नहीं आई जितनी रेवेन्यू में आई। इसकी मुख्य वजह बढ़े हुए ऑपरेशनल खर्चे और इंटरेस्ट कॉस्ट (ब्याज खर्च) हैं। बैंक का इंटरेस्ट एक्सपेंडिचर पिछले साल के ₹498.30 करोड़ से बढ़कर ₹587.18 करोड़ हो गया।
एसेट क्वालिटी में सुधार और डिविडेंड का ऐलान
एक अच्छी खबर यह है कि बैंक की एसेट क्वालिटी में हल्का सुधार हुआ है। ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) घटकर 2.54% और नेट एनपीए (Net NPA) 1.24% पर आ गया है। शेयरहोल्डर्स को खुश करते हुए, बैंक ने FY26 के लिए ₹5 प्रति शेयर के डिविडेंड (Dividend) का प्रस्ताव भी दिया है।
खर्चों का दबाव और वन-टाइम चार्ज
बैंक के कुल खर्चे (प्रोविजन को छोड़कर) 15.36% बढ़े हैं, जो रेवेन्यू ग्रोथ से थोड़े ज्यादा हैं। इसके अलावा, लेबर कोड से जुड़े नए नियमों के कारण ₹12.93 लाख का एक वन-टाइम चार्ज भी बुक किया गया है।
आगे क्या देखें?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि Capital SFB कैसे अपने बढ़ते खर्चों और इंटरेस्ट कॉस्ट को मैनेज करता है ताकि प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हो सके। इसके अलावा, कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो और एनपीए में और कमी की दिशा में प्रगति भी अहम रहेगी।
