प्रमोटर की हिस्सेदारी कितनी और कैसी?
Canara Bank ने SEBI के नियमों के तहत यह जानकारी दी है कि 31 मार्च 2026 तक, प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया, जो बैंक के प्रमोटर हैं, उनकी कुल पूंजी में 62.93% की हिस्सेदारी बनी हुई है। सबसे अहम बात यह है कि पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, प्रमोटर के इन शेयरों पर न तो कोई गिरवी (pledge) रखा गया और न ही कोई और देनदारी (encumbrance) डाली गई।
क्यों है यह खबर अहम?
यह जानकारी SEBI की Substantial Acquisition of Shares and Takeovers (SAST) रेगुलेशन के तहत एक रूटीन डिस्क्लोजर है। यह साफ करता है कि बैंक की ओनरशिप स्ट्रक्चर काफी स्टेबल है। प्रमोटर की इतनी बड़ी हिस्सेदारी पर किसी भी तरह की देनदारी न होना निवेशकों के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। इसका मतलब है कि ये शेयर किसी मजबूरी में बेचे नहीं जा सकते और बाजार में फ्रीली ट्रेड हो सकते हैं।
SEBI के नियमों के अनुसार, प्रमोटर्स को अपने शेयरहोल्डिंग में होने वाले किसी भी बदलाव, जैसे गिरवी रखने या देनदारी डालने, का खुलासा करना अनिवार्य होता है। यह ट्रांसपेरेंसी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।
सरकारी बैंकों में कैसी है हिस्सेदारी?
Canara Bank की तरह, भारत के अन्य बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) में भी सरकार की हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 57.5%, बैंक ऑफ बड़ौदा में 64.5%, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 73.2% और इंडियन बैंक में 73.8% है।
यह जानकारी Canara Bank के गवर्नेंस में स्थिरता को और मजबूत करती है।
