लोन की EMI पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो बैंक से अल्पावधि (short-term) या मध्यम-अवधि (medium-term) के लिए लोन लेते हैं। जहाँ एक ओर Overnight लोन सस्ते हुए हैं, वहीं 3 महीने के लोन लेना अब महंगा हो जाएगा। एक महीने, छह महीने और एक साल के लोन की दरें फिलहाल 8.20%, 8.70%, और 8.85% पर अपरिवर्तित रहेंगी।
बैंक की दमदार परफॉरमेंस
ये रेट एडजस्टमेंट ऐसे समय में आए हैं जब बैंक ऑफ महाराष्ट्र का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। पुणे स्थित इस सरकारी बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में ₹2,014 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 35% की भारी बढ़ोतरी है। यह ग्रोथ लोन में 22% की बढ़त और लगभग 3.9% के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) से प्रेरित है।
आगे की राह और रणनीति
बैंक का CASA (Current Account Savings Account) रेश्यो 53% पर बना हुआ है, जो बताता है कि बैंक के पास जमाओं की अच्छी खासी हिस्सेदारी है। बैंक फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए 18% के क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है। भविष्य के लिए, बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स के ज़रिए ₹10,000 करोड़ जुटाने की भी योजना बना रहा है।
दूसरी बैंकों के मुकाबले स्थिति
अन्य सरकारी बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) भी अपनी फंडिंग लागत के आधार पर MCLR बदलते रहते हैं। उदाहरण के लिए, SBI का MCLR मिड-2025 तक ओवरनाइट के लिए 7.85% से लेकर 3 साल के लोन के लिए 8.80% तक था। इसी तरह, बैंक ऑफ इंडिया ने 1 मई, 2026 से 1 साल के MCLR को 8.75% पर अपरिवर्तित रखा है। यह दिखाता है कि सेक्टर में अलग-अलग रेट रणनीतियां चल रही हैं।
