₹7,500 करोड़ जुटाने की मंजूरी
बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में यह बड़ा फैसला लिया गया है। बैंक 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹7,500 करोड़ के बेसल-III (Basel-III) कंप्लायंट Tier-I और Tier-II बॉन्ड जारी करेगा। इस कुल राशि में से ₹2,500 करोड़ Tier-I बॉन्ड्स से और ₹5,000 करोड़ Tier-II बॉन्ड्स से जुटाए जाएंगे।
कैपिटल एडिक्वेसी को मिलेगी मजबूती
इस फंड रेजिंग का मुख्य मकसद बैंक की कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) को और बेहतर बनाना है। इससे बैंक की फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत होगी और वह भविष्य की ग्रोथ योजनाओं को आगे बढ़ा सकेगा। मजबूत कैपिटल बेस, लोन देने की क्षमता को बनाए रखने और किसी भी आर्थिक झटके को झेलने के लिए बहुत जरूरी होता है।
पहले भी हो चुकी है फंड रेजिंग
बैंक ऑफ इंडिया पहले भी कई बार मार्केट से फंड जुटा चुका है। दिसंबर 2025 में बैंक ने 7.28% यील्ड पर ₹2,500 करोड़ के Tier-II बॉन्ड जारी किए थे। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2025 में 7.23% यील्ड पर ₹10,000 करोड़ जुटाए गए थे। पिछले साल ही बैंक के बोर्ड ने FY26 में डेट मार्केट से ₹25,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी थी। मार्च 2025 तक बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 17.77% था, जबकि कॉमन इक्विटी टियर 1 (CET-1) रेशियो 14.84% दर्ज किया गया था।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस कैपिटल रेज से शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए अच्छी खबर है। इससे बैंक की फाइनेंशियल पोजीशन और मजबूत होगी, जो भविष्य में बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और डिविडेंड (Dividend) को सपोर्ट कर सकती है। यह कदम बैंक को लेंडिंग (Lending) के नए मौके तलाशने और ग्रोथ स्ट्रेटेजी (Growth Strategy) को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, साथ ही निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाएगा।
इंडस्ट्री में भी जारी है कैपिटल रेजिंग
पब्लिक सेक्टर के दूसरे बड़े बैंक भी अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने के लिए फंड जुटा रहे हैं। उदाहरण के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने FY26 में ₹20,000 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने की मंजूरी दी है। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने H1FY25 में QIP के जरिए ₹5,000 करोड़ जुटाए थे।
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल, मार्च 2025 तक बैंक ऑफ इंडिया का CAR 17.77% था, जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा तय न्यूनतम 9% की सीमा से काफी ऊपर है। तुलना के लिए, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का CAR उसी समय 17.0% था। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि बैंक 2026-27 के दौरान इन बॉन्ड को कब जारी करता है, निवेशकों की इसमें कितनी दिलचस्पी रहती है और इन फंड्स को बैंक अपनी ग्रोथ के लिए कैसे इस्तेमाल करता है।
