Bank of Baroda: बैंक की बड़ी चाल! **₹6,000 करोड़** जुटाने की तैयारी, जानिए पूरी प्लानिंग

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bank of Baroda: बैंक की बड़ी चाल! **₹6,000 करोड़** जुटाने की तैयारी, जानिए पूरी प्लानिंग
Overview

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। बैंक के बोर्ड ने **₹6,000 करोड़** तक की राशि जुटाने की मंजूरी दे दी है। यह पैसा मार्च **2027** तक एडिशनल टियर 1 (AT1) और टियर II बॉन्ड्स के ज़रिए जुटाया जाएगा। इस कदम का मकसद बैंक की लोन देने की क्षमता और भविष्य की ग्रोथ को सहारा देना है, हालांकि इसके लिए रेगुलेटरी मंजूरी का इंतज़ार रहेगा।

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बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने बोर्ड से ₹6,000 करोड़ जुटाने की मंज़ूरी हासिल कर ली है। यह फंड एडिशनल टियर 1 (AT1) और/या टियर II बॉन्ड्स के ज़रिए, किश्तों में 31 मार्च, 2027 तक जुटाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए बैंक को ज़रूरी सरकारी और रेगुलेटरी मंज़ूरी हासिल करनी होगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के लिए अपनी कैपिटल को मजबूत करना बहुत अहम है, खासकर जब उन्हें लोन (Lending) बढ़ाने और बेसल III (Basel III) जैसे बदलते रेगुलेटरी नियमों का पालन करना हो। AT1 और Tier II बॉन्ड्स हाइब्रिड डेट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जो मौजूदा शेयरधारकों (Shareholders) के लिए तुरंत इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) किए बिना बैंक की कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (Capital Adequacy Ratio) को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब बैंक ऑफ बड़ौदा ने कर्ज़ के ज़रिए कैपिटल जुटाई हो। मार्च 2023 में भी बैंक ने AT1 बॉन्ड्स से ₹5,000 करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए थे। यह बैंक की कैपिटल स्ट्रक्चर को मैनेज करने और भविष्य की ग्रोथ की ज़रूरतों को पूरा करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। असल में, आजकल ज़्यादातर PSU बैंक्स अपनी बैलेंस शीट को मज़बूत कर रहे हैं ताकि वे ज़्यादा लोन दे सकें और किसी भी आर्थिक झटके को झेल सकें।

शेयरधारकों के लिए: इस डेट इश्यू (Debt Issuance) से तुरंत इक्विटी डाइल्यूशन नहीं होगा, जो मौजूदा शेयरधारकों को अक्सर पसंद आता है।
बैंक के लिए: कैपिटल बढ़ाने से बैंक की सॉल्वेंसी (Solvency) मज़बूत होगी और क्रेडिट देने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे बिज़नेस एक्सपेंशन (Business Expansion) को सहारा मिलेगा।
रेगुलेटरी कंप्लायंस: यह बैंक को अपने कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो को बनाए रखने और सुधारने में मदद करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि बैंक रेगुलेटरी ज़रूरतों के दायरे में रहे।

इस फंडरेज़िंग प्लान में मुख्य रिस्क यह है कि यह पूरी तरह से ज़रूरी सरकारी और रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर निर्भर करता है। अगर ये मंज़ूरी नहीं मिलीं, तो यह कैपिटल जुटाना संभव नहीं होगा।

देश के सबसे बड़े लेंडर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) ने भी फरवरी 2024 में टियर II बॉन्ड्स के ज़रिए ₹10,000 करोड़ जुटाए थे। इसी तरह, पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) जैसे दूसरे बड़े PSU बैंकों ने भी अपनी कैपिटल मज़बूत करने के लिए डेट इश्यू किए हैं। यह दिखाता है कि PSU बैंकों में कैपिटल मैनेजमेंट को लेकर एक इंडस्ट्री ट्रेंड चल रहा है।

  • Q3 FY24 के अंत तक बैंक का कंसोलिडेटेड कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 15.76% था।
  • बैंक पहले भी AT1 बॉन्ड इश्यूज़ कर चुका है: मार्च 2023 में ₹5,000 करोड़ और दिसंबर 2022 में ₹3,000 करोड़ के।

आने वाले समय में क्या देखना अहम होगा:

  • रेगुलेटरी मंज़ूरी कब और किन शर्तों पर मिलती है, इस पर नज़र रखें।
  • AT1 और Tier II बॉन्ड्स के स्पेसिफिक ट्रान्शेज़ (Tranches) और उनकी शर्तों (जैसे इंटरेस्ट रेट, मैच्योरिटी) का ऐलान।
  • इस कैपिटल इनफ्यूज़न (Capital Infusion) का आने वाली तिमाहियों में बैंक की लोन ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर क्या असर पड़ता है।
  • बैंक मैनेजमेंट इस फंड के इस्तेमाल को लेकर क्या कहता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.