बैंक ऑफ बड़ौदा की 'सक्षम निवेशक' पहल
बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने शेयरधारकों को बेहतर सुविधा देने के लिए एक विशेष 100-दिवसीय अभियान 'सक्षम निवेशक' (Saksham Niveshak) की शुरुआत की है। यह अभियान 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 9 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शेयरधारकों को उनके KYC (Know Your Customer) डिटेल्स को अपडेट करने और किसी भी बकाया डिविडेंड (unpaid dividends) का दावा करने में सहायता करना है। बैंक ने इस अभियान के माध्यम से शेयरधारकों से आग्रह किया है कि वे समय पर इन प्रक्रियाओं को पूरा करें ताकि उनके पैसे Investor Education and Protection Fund (IEPF) में ट्रांसफर न हों।
क्या है IEPF और यह अभियान क्यों महत्वपूर्ण?
IEPF (Investor Education and Protection Fund Authority) वह संस्था है जो ऐसे लावारिस फंड्स को संभालती है जिनका कोई दावा करने वाला नहीं होता। हाल के नियमों के अनुसार, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) जैसे बैंक ऑफ बड़ौदा को 1 अगस्त 2025 से शुरू होकर 7 साल से लावारिस पड़े शेयर और डिविडेंड को IEPF में ट्रांसफर करना होगा। इस नियम को ध्यान में रखते हुए, बैंक ऑफ बड़ौदा यह अभियान चला रहा है ताकि शेयरधारक अपनी बकाया राशि का दावा कर सकें और यह पैसा सीधे उनके खाते में आए, न कि IEPF में जमा हो।
कार्रवाई न करने के जोखिम
जो शेयरधारक इस अभियान के दौरान अपने KYC अपडेट नहीं करवाते या बकाया डिविडेंड का दावा नहीं करते, उनके पैसे IEPF में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। हालांकि, इन पैसों को बाद में IEPF से क्लेम किया जा सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया अधिक जटिल और समय लेने वाली हो सकती है।
अन्य बैंकों की पहल
बैंक ऑफ बड़ौदा ही नहीं, बल्कि State Bank of India (SBI) और Punjab National Bank (PNB) जैसे अन्य प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंक भी शेयरधारकों के साथ संवाद बेहतर करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह के निवेशक आउटरीच प्रोग्राम चला रहे हैं। हाल के वर्षों में पब्लिक सेक्टर बैंकों ने अपने प्रदर्शन और डिजिटल एडॉप्शन में काफी सुधार किया है।
