यह बड़ा फेरबदल पब्लिक सेक्टर बैंकिंग (PSU Banking) में एक अहम लीडरशिप ट्रांजिशन (Leadership Transition) को दर्शाता है। सुशांता कुमार मोहंती, जो बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) में ट्रेजरी और ग्लोबल मार्केट्स (Treasury and Global Markets) के चीफ जनरल मैनेजर (CGM) और हेड के पद पर थे, अब बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (Executive Director) की भूमिका निभाएंगे। यह बदलाव 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, और इसके साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रेजरी का एक महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएगा।
क्यों अहम है यह बदलाव?
किसी बैंक के ट्रेजरी और ग्लोबल मार्केट्स हेड की भूमिका बेहद अहम होती है। यह व्यक्ति बैंक की लिक्विडिटी (Liquidity), निवेश (Investments) और फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) ऑपरेशंस को मैनेज करता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद से किसी का जाना बैंक के लिए एडजस्टमेंट पीरियड (Adjustment Period) ला सकता है और रणनीतिक समीक्षा (Strategic Review) की ज़रूरत पड़ सकती है। वहीं, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लिए, मोहंती की नियुक्ति एक अनुभवी लीडरशिप (Experienced Leadership) लाएगी और बैंक की स्ट्रैटेजी (Strategy) व ऑपरेशंस (Operations) में नए विचार शामिल कर सकती है।
मोहंती का अनुभव
सुशांता कुमार मोहंती के पास बैंकिंग के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ न्यूयॉर्क (New York) जैसे अंतरराष्ट्रीय जगहों पर भी काम किया है। इसी साल, उन्हें फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूशंस ब्यूरो (FSIB) द्वारा 2025-26 के लिए पब्लिक सेक्टर बैंकों में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर प्रमोशन के लिए 11 चीफ जनरल मैनेजर्स में से एक के तौर पर सिफ़ारिश की गई थी।
दोनों बैंकों पर असर
बैंक ऑफ बड़ौदा को अब अपने ट्रेजरी और ग्लोबल मार्केट्स जैसे अहम पद के लिए एक नए सक्सेसर (Successor) की तलाश करनी होगी, जिसका असर उनकी मार्केट और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (Investment Strategy) में निरंतरता बनाए रखने पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र को मोहंती जैसे अनुभवी लीडर के आने से बैंक के विकास (Growth) में योगदान की उम्मीद है।
मार्केट कैप की तुलना
15 अप्रैल 2026 तक, बैंक ऑफ बड़ौदा का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1.44 ट्रिलियन था। इसकी तुलना में, 13 अप्रैल 2026 तक बैंक ऑफ महाराष्ट्र का मार्केट कैप लगभग ₹54,910 करोड़ था। दोनों ही बैंक सरकारी निगरानी में काम करने वाले प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंक हैं।
आगे क्या?
निवेशक अब बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा ट्रेजरी और ग्लोबल मार्केट्स भूमिका के लिए मोहंती के सक्सेसर के चुनाव पर नज़र रखेंगे। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लिए, यह देखना अहम होगा कि मोहंती अपनी एग्जीक्यूटिव लीडरशिप में कैसे इंटीग्रेट (Integrate) होते हैं और बैंक के स्ट्रेटेजिक लक्ष्यों (Strategic Goals) में कैसे योगदान देते हैं। पब्लिक सेक्टर बैंकिंग सेक्टर में ऐसे सीनियर मैनेजमेंट मूवमेंट्स (Senior Management Movements) के व्यापक प्रभाव पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
