Bank of Baroda: गवर्नेंस पर उठे सवाल! FY26 रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bank of Baroda: गवर्नेंस पर उठे सवाल! FY26 रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
Overview

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के **FY26** के अनुपालन रिपोर्ट में गवर्नेंस से जुडी दो बड़ी चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) के नियमों का पालन नहीं कर रहा, खासकर तब जब चेयरमैन नॉन-एग्जीक्यूटिव हों। इसके अलावा, कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) की रिपोर्टिंग व्यवस्था SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) के मुताबिक नहीं पाई गई है।

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रिपोर्ट में क्या है खास?

बैंक ऑफ बड़ौदा ने FY26 (Financial Year 2026) के लिए अपनी एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट (Annual Secretarial Compliance Report) फाइल की है। इस रिपोर्ट को बाहरी कंसल्टेंट्स, रागिनी चोक्सी एंड कंपनी (Ragini Chokshi & Co.) ने तैयार किया है, जिसमें गवर्नेंस को लेकर दो खास बातों पर ध्यान दिलाया गया है।

दो बड़ी चिंताएं:

पहली समस्या यह है कि जब बैंक का चेयरमैन नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (Non-Executive Director) होता है, तो बैंक की बोर्ड संरचना इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) के जरूरी मानदंडों को पूरा नहीं करती है।

दूसरी गंभीर बात यह है कि कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) की रिपोर्टिंग व्यवस्था SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन के अनुरूप पूरी तरह से नहीं है। फिलहाल, कंपनी सेक्रेटरी एक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (Executive Director) को रिपोर्ट करते हैं।

क्या कहता है बैंक?

बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसकी बोर्ड संरचना बैंकिंग कंपनीज़ एक्ट, 1970 (Banking Companies Act, 1970) जैसे विशेष कानूनों द्वारा शासित होती है। साथ ही, डायरेक्टरों की नियुक्ति भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस (Ministry of Finance) द्वारा की जाती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के नियमों का पालन करना निवेशकों का भरोसा बनाए रखने और रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बहुत ज़रूरी है। SEBI के सख्त नियम लिस्टेड कंपनियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए, गवर्नेंस स्ट्रक्चर अक्सर सरकारी नीतियों और नियुक्ति प्रक्रियाओं से तय होते हैं, जो कुछ खास चुनौतियां पेश कर सकती हैं।

बैंक के अगले कदम?

बैंक ऑफ बड़ौदा बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस और भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। साथ ही, बैंक कंपनी सेक्रेटरी की रिपोर्टिंग लाइन को SEBI की गाइडलाइन्स के अनुसार लाने के लिए इसमें बदलाव की योजना बना रहा है।

संभावित जोखिम और अन्य बैंक

इन मुद्दों के लगातार बने रहने से रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Action) का सामना करना पड़ सकता है और बैंक की गवर्नेंस प्रैक्टिस पर सवाल उठ सकते हैं। सरकारी नियुक्तियों में देरी इस अनुपालन न होने की अवधि को और लंबा खींच सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और केनरा बैंक (Canara Bank) जैसे अन्य बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक भी इसी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत काम करते हैं। उन्हें भी सरकारी डायरेक्टरों की नियुक्तियों और SEBI के गवर्नेंस मानदंडों से निपटना पड़ता है। इसलिए, बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए पहचानी गई बोर्ड संरचना और रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर की चुनौतियाँ इसी तरह की नियुक्ति प्रक्रियाओं से जूझ रहे अन्य पब्लिक सेक्टर बैंकों में भी आम हो सकती हैं।

आगे क्या देखें?

निवेशक मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस से बैंक ऑफ बड़ौदा के बोर्ड में नए डायरेक्टर्स की नियुक्ति को लेकर आने वाले अपडेट्स पर नज़र रखेंगे। कंपनी सेक्रेटरी के लिए संशोधित रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर की पुष्टि भी एक महत्वपूर्ण संकेत होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.