Bajaj Finance Limited ने ₹2,892.42 करोड़ की यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के ज़रिए सिक्योर्ड रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) इश्यू करके जुटाई है। इस कैपिटल इनफ्यूजन का मकसद कंपनी के बिजनेस ऑपरेशंस को आगे बढ़ाना और विस्तार (expansion) करना है, साथ ही फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाना भी है।
NCD इश्यूएंश का ब्योरा:
इस डिबेंचर ऑफरिंग में दो ऑप्शन शामिल थे: ऑप्शन I, जिसकी वैल्यू ₹1,070.42 करोड़ थी, वह 7.77% सालाना ब्याज दर और लगभग तीन साल की अवधि के साथ आया। वहीं, ऑप्शन II ने ₹1,822 करोड़ जुटाए, जिसमें 8.00% सालाना ब्याज दर और करीब पांच साल की अवधि थी। इन NCDs को बीएसई होलसेल डेट मार्केट (BSE Wholesale Debt Market) पर लिस्ट किया जाएगा।
ग्रोथ और स्थिरता के लिए अहमियत:
यह सफल डेट इश्यूएंस, खासकर लंबी अवधि के लिए बड़ी रकम जुटाने में Bajaj Finance की डेट कैपिटल मार्केट तक मजबूत पहुंच को दर्शाता है। अपनी फंडिंग में विविधता लाकर, कंपनी किसी एक साधन या लेंडर पर अपनी निर्भरता कम करती है, जिससे उसकी वित्तीय मजबूती बढ़ती है। यह कैपिटल उसे ग्रोथ के महत्वपूर्ण मौकों को भुनाने में और अधिक लचीलापन प्रदान करती है।
फंडिंग की Ongoing स्ट्रेटेजी:
Bajaj Finance अपने एसेट ग्रोथ को फाइनेंस करने के लिए NCDs और बैंक लोन सहित विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स का नियमित रूप से इस्तेमाल करती है। कंपनी अपनी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने और मजबूत लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए पिछले कुछ सालों से कई डेट इश्यूएंश कर चुकी है।
ध्यान देने योग्य रिस्क फैक्टर्स:
इन NCDs को कंपनी के बुक डेट्स और लोन रिसीवेबल्स पर चार्ज (गिरवी) द्वारा सुरक्षित किया गया है। एक महत्वपूर्ण कोवेनेंट (शर्त) यह है कि इस सिक्योरिटी का मूल्य, कुल बकाया डिबेंचर वैल्यू को कम से कम 1.00 टाइम कवर करना चाहिए। इस सिक्योरिटी कवर को बनाए रखने में विफलता, डिबेंचर होल्डर्स के लिए मिलने वाले प्रोटेक्शन को प्रभावित कर सकती है।
इंडस्ट्री का परिदृश्य:
NBFC सेक्टर की अन्य कंपनियां, जैसे Shriram Finance, LIC Housing Finance, और Poonawalla Fincorp भी अपने लेंडिंग ऑपरेशंस और ग्रोथ को फंड करने के लिए डेट मार्केट्स पर निर्भर करती हैं।
