₹5.5 लाख करोड़ की उधार सीमा: Bajaj Finance के बोर्ड का बड़ा फैसला
Bajaj Finance Ltd. के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 29 अप्रैल 2026 को हुई एक मीटिंग में कंपनी की कुल उधार सीमा को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत, कंपनी मौजूदा ₹375,000 करोड़ की उधार सीमा को बढ़ाकर ₹550,000 करोड़ करने का लक्ष्य रख रही है। यह कदम कंपनी को अपने स्ट्रेटेजिक ऑब्जेक्टिव्स और विस्तार योजनाओं के लिए वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी देगा।
इस बढ़ोतरी को कंपनी की आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है। फंड जुटाने का काम मुख्य रूप से डेट इंस्ट्रूमेंट्स, जिसमें भारतीय और विदेशी करेंसी के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) शामिल हैं, के जरिए किया जाएगा।
यह बढ़ी हुई सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
Bajaj Finance जैसी तेजी से बढ़ रही नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFC) के लिए, एक ऊंची उधार सीमा का मतलब सीधे तौर पर लेंडिंग और बिजनेस विस्तार की क्षमता में वृद्धि है। यह बढ़ा हुआ डेट सीलिंग कंपनी को एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के बड़े बेस को सपोर्ट करने की अनुमति देता है, जो इसकी ग्रोथ मोमेंटम को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू स्ट्रीम्स और बढ़ती लिवरेज को जिम्मेदारी से मैनेज करने की क्षमता में भी विश्वास दिखाता है।
ग्रोथ के लिए फंड जुटाने का इतिहास
Bajaj Finance के पास अपनी विस्तार योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए कैपिटल मार्केट्स से फंड जुटाने का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। कंपनी ने पहले भी NCD इश्यूएंसेज के जरिए बड़ी रकम जुटाई है, जिसमें जनवरी 2026 में ₹5,120 करोड़ और अप्रैल 2026 में ₹2,004.31 करोड़ शामिल हैं। कंपनी ने मार्च 2015 में ₹500,000 करोड़ की उधार सीमा के लिए शेयरधारकों की मंजूरी हासिल की थी। मार्च 2025 तक कंपनी का AUM ₹416,661 करोड़ था।
इस फैसले के निहितार्थ
अगर शेयरधारक इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो Bajaj Finance की डेट-रेजिंग कैपेसिटी में काफी इजाफा होगा। यह बढ़ी हुई बोरोइंग कैपेसिटी कंपनी को बड़े ग्रोथ अवसरों का फायदा उठाने के लिए वित्तीय मजबूती प्रदान करेगी, जिससे AUM विस्तार में तेजी आ सकती है। यह कंपनी को अपने फंडिंग मिक्स को मैनेज करने और भविष्य की कैपिटल रिक्वायरमेंट्स को पूरा करने में भी अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देगा।
संभावित जोखिम और निगरानी
इस प्रस्ताव के सामने सबसे बड़ा जोखिम शेयरधारक अप्रूवल पर निर्भरता है। अगर यह मंजूरी नहीं मिलती है, तो भविष्य के फंडरेजिंग प्लान्स प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यह सीधे तौर पर इस प्रस्ताव से जुड़ा नहीं है, Bajaj Finance पहले भी रेगुलेटरी ओवरसाइट का सामना कर चुकी है। जुलाई 2024 में IRDAI ने रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन के लिए ₹2 करोड़ का जुर्माना लगाया था, और अक्टूबर 2023 में RBI ने फ्रॉड मॉनिटरिंग डायरेक्शंस का पालन न करने पर ₹8.50 लाख का जुर्माना लगाया था।
इंडस्ट्री का संदर्भ: पीयर फंडिंग
Bajaj Finance एक प्रतिस्पर्धी NBFC परिदृश्य में काम करती है। Cholamandalam Investment and Finance Company Ltd, एक प्रमुख डाइवर्सिफाइड NBFC, ने दिसंबर 2025 तक ₹210,704 करोड़ का AUM रिपोर्ट किया, जिसमें फंडिंग के लिए डेट और सिक्योरिटाइजेशन का मिश्रण उपयोग किया गया। Poonawalla Fincorp Ltd भी एक बढ़ता हुआ प्लेयर है, जिसका लक्ष्य FY26 में 40% से अधिक AUM ग्रोथ हासिल करना है (Q1 FY26 में ₹41,273 करोड़ AUM)। ये पीयर्स डेट कैपिटल मार्केट्स पर इंडस्ट्री की निर्भरता को दर्शाते हैं।
मुख्य वित्तीय मेट्रिक्स
- Bajaj Finance का कंसॉलिडेटेड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) FY25 में ₹416,661 करोड़ रहा।
- कंपनी का कंसॉलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो मार्च 2025 तक 3.77x था।
आगे क्या देखना है?
तत्काल फोकस एनुअल जनरल मीटिंग में शेयरधारकों के वोट के परिणाम पर होगा। निवेशक प्रस्तावित फंडरेजिंग एक्टिविटीज के टर्म्स, टेन्योर और विशिष्ट इंस्ट्रूमेंट्स पर बाद की घोषणाओं को भी ट्रैक करेंगे। आगे चलकर, बढ़ी हुई बोरोइंग कैपेसिटी का उपयोग AUM ग्रोथ को बढ़ाने और नए बिजनेस इनिशिएटिव्स को सपोर्ट करने के लिए कैसे किया जाता है, इस पर नजर रखी जाएगी।
