क्यों लगा जुर्माना?
सरकारी कंपनी HUDCO को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने मिलकर ₹5,42,800 का जुर्माना ठोंका है। यह पेनल्टी SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस के तहत बोर्ड कंपोजीशन को लेकर की गई चूक के कारण लगाई गई है। इस कुल जुर्माने में ₹4,60,000 का बेस फाइन और 18% GST यानी ₹82,800 शामिल हैं। कंपनी को एक्सचेंज के नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर यह रकम चुकानी होगी।
कंपनी की क्या है दलील?
HUDCO ने इन पेनल्टीज़ के लिए वेवर (Waiver) यानी छूट की मांग की है। कंपनी का कहना है कि बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति उनके सीधे नियंत्रण में नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रपति द्वारा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के जरिए की जाती है। इसी वजह से यह कंप्लायंस लैप्स (Compliance Lapse) हुआ है।
क्या हैं आगे के खतरे?
यह जुर्माना इस बात की ओर इशारा करता है कि रेगुलेटर्स, खासकर लिस्टेड पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सख्ती बढ़ रही है। HUDCO के लिए यह एक चुनौती है कि जब डायरेक्टर्स की नियुक्ति सरकारी प्रक्रियाओं पर निर्भर हो तो बोर्ड कंपोजीशन को कैसे बनाए रखा जाए।
यह पहली बार नहीं है जब HUDCO को इस मुद्दे पर जुर्माना झेलना पड़ा है। इससे पहले जून 2021 में भी कंपनी को इसी तरह के कारणों से NSE और BSE से फाइन लग चुका है। इसके अलावा, अगर कंपनी लगातार नियमों का पालन नहीं करती है या जुर्माना नहीं भरती है, तो उसे Z-ग्रुप में ट्रांसफर किया जा सकता है और स्टॉक ट्रेडिंग पर सस्पेंशन (Trading Suspension) का खतरा भी मंडरा सकता है।
30 सितंबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, HUDCO के बोर्ड में 7 डायरेक्टर थे, जिसमें 3 फंक्शनल, 1 सरकारी नॉमिनी और 3 इंडिपेंडेंट शामिल थे। वहीं, नियमों के अनुसार 4 इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की ज़रूरत थी।
इसी तरह की पेनल्टीज़ SJVN Limited और REC Limited जैसी कंपनियों पर भी BSE और NSE लगा चुके हैं, क्योंकि उनके मंत्रालयों से डायरेक्टर्स की नियुक्ति में देरी के कारण वे भी बोर्ड कंपोजीशन के नियमों का पालन नहीं कर पाए थे।
