Aye Finance Limited ने हाल ही में 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए अपनी एनुअल सीक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट जमा की है। संजय ग्रोवर एंड एसोसिएट्स द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कंपनी के SEBI रेगुलेशन्स के पालन की पुष्टि तो की गई है, लेकिन कुछ अहम बातों पर भी प्रकाश डाला गया है।
सबसे बड़ा जुर्माना
सबसे बड़ा मुद्दा BSE द्वारा लगाया गया ₹1,48,680 (GST सहित) का जुर्माना है। यह जुर्माना कंपनी द्वारा 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही (Q3 FY26) के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को 18 दिन की देरी से जमा करने के कारण लगाया गया है।
पुराने मुद्दे और KMP लोन
रिपोर्ट में एक पुराने मामले का भी जिक्र है, जिसमें ISIN रिकॉर्ड डेट की सूचना देने में देरी हुई थी। इसके अलावा, एक रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन, जिसमें एक की मैनेजेरियल पर्सन (KMP) को लोन दिया गया था, उसे भी ऑडिट कमेटी से तात्कालिकता के कारण शुरुआत में मंजूरी नहीं मिली थी, हालांकि बाद में इसे रेटिफाई (ratify) कर दिया गया।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
एक लिस्टेड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर, Aye Finance के लिए मजबूत कंप्लायंस बनाए रखना निवेशकों के भरोसे और रेगुलेटरी स्टेटस के लिए बहुत ज़रूरी है। फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में देरी, भले ही IPO जैसी बड़ी कॉर्पोरेट गतिविधियों से जुड़ी हो, इंटरनल कंट्रोल्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सवाल उठा सकती है।
Aye Finance, जो MSMEs को लोन देने वाली NBFC है, ने 16 फरवरी, 2026 को अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) पूरा किया था और BSE व NSE पर लिस्ट हुई थी। यह पहली बार नहीं है कि Aye Finance को देर से फाइलिंग के लिए पेनल्टी झेलनी पड़ी हो; पिछले फाइनेंशियल ईयर्स में भी ऐसे मामले सामने आए थे।
निवेशक अब भविष्य में ऐसी देरी पर कड़ी नजर रखेंगे, क्योंकि यह मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। कुछ अन्य लिस्टेड NBFCs जैसे Paisalo Digital Ltd., Indostar Capital Finance Ltd., SBFC Finance Limited और Five-Star Business Finance Limited भी इसी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत काम करती हैं। Aye Finance का 22.9x का प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) रेशियो अपने पीयर्स और इंडस्ट्री एवरेज की तुलना में महंगा माना जा रहा है।
