Axis Bank ने हाल ही में 1,17,723 नए इक्विटी शेयर इश्यू किए हैं। ये शेयर बैंक की अपनी ESOP (Employee Stock Option Plan) और RSU (Restricted Stock Unit) स्कीम के तहत 15 अप्रैल 2026 को अलॉट किए गए।
इस इश्यू के बाद, बैंक का कुल पेड-अप शेयर कैपिटल ₹6,216,644,200 से बढ़कर ₹6,216,879,646 हो गया है। वहीं, कुल आउटस्टैंडिंग इक्विटी शेयर्स की संख्या भी बढ़कर 3,108,439,823 हो गई है, जो पहले 3,108,322,100 थी।
इस कदम का मुख्य मकसद कर्मचारियों को कंपनी से जोड़ना और उन्हें कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ में भागीदार बनाना है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे इश्यू से मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए EPS (Earnings Per Share) में मामूली डाइल्यूशन (dilution) हो सकता है।
Axis Bank लगातार ESOP और RSU स्कीम का इस्तेमाल अपने एम्प्लॉइज को रिवॉर्ड देने और उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए करता आया है। मार्च 2026 और जनवरी 2026 में भी इसी तरह के अलॉटमेंट हुए थे। बैंक की 'Axis Bank Limited Employee Stock Unit Scheme, 2022' का लक्ष्य कर्मचारियों में ओनरशिप की भावना पैदा करना है।
अगर ESOP अलॉटमेंट को ध्यान से मैनेज न किया जाए, तो आगे चलकर शेयर डाइल्यूशन का खतरा बढ़ सकता है।
इस तरह की प्रैक्टिस सिर्फ Axis Bank तक सीमित नहीं है। HDFC Bank, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank जैसी बड़ी प्राइवेट सेक्टर की बैंकें भी टैलेंट को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए ESOPs का भरपूर इस्तेमाल करती हैं।
FY25 के लिए, Axis Bank का कंसोलिडेटेड ROE (Return on Equity) 16.89% और ROA (Return on Assets) 1.77% रहा। वहीं, 31 मार्च 2025 तक, बैंक का CAR (Capital Adequacy Ratio) 17.07% था।
निवेशकों की नजरें आगे भी ESOP/RSU अलॉटमेंट के नए एलान, शेयर डाइल्यूशन और EPS ग्रोथ पर इसके असर पर रहेंगी।