ऑफर की ताज़ा स्थिति
Citigroup Global Markets India Private Limited, जो इस ऑफर के मैनेजर हैं, की ओर से आई ताज़ा जानकारी के मुताबिक, आम शेयरधारकों (public shareholders) में से किसी ने भी इस बोली में हिस्सा नहीं लिया। ऑफर की अवधि 17 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक तय की गई थी, लेकिन नतीजे की घोषणा 21 अप्रैल 2026 तक किसी भी शेयर का टेंडर न होने पर हुई।
बोली की नाकामी का मतलब
इतने बड़े ओपन ऑफर के लिए 'ज़ीरो टेंडर' का नतीजा साफ तौर पर दिखाता है कि शेयरधारक या तो ऑफर प्राइस (₹139 प्रति शेयर) पर अपने शेयर बेचने को तैयार नहीं हैं, या फिर उन्हें Avenir Investment RSC Ltd द्वारा पेश की गई शर्तों पर भरोसा नहीं है। यह स्थिति कंपनी की भविष्य की योजनाओं और उसके रियल वैल्यूएशन पर भी सवाल खड़े करती है।
कंपनी का बैकग्राउंड और रेगुलेटरी सफर
Sammaan Capital, जिसे पहले Indiabulls Housing Finance के नाम से जाना जाता था, भारत में एक मॉर्गेज-फोकस्ड NBFC है। Avenir Investment RSC Ltd, जो अबू धाबी की International Holding Company (IHC) द्वारा समर्थित है, ने अप्रैल 2026 में ₹139 प्रति शेयर के भाव पर यह ओपन ऑफर शुरू किया था। कंपनी को मार्च 2026 तक SEBI, RBI और CCI से इस डील के लिए सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिल चुके थे।
हालांकि, Sammaan Capital का रेगुलेटरी जांच का इतिहास भी रहा है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई हुई थी, जहां जांच एजेंसियों द्वारा पुराने आरोपों को संभालने को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। कंपनी ने पहले स्पष्ट किया था कि ये मामले एक पूर्व प्रमोटर से जुड़े थे और कंपनी का रिकॉर्ड साफ रहा है।
ऑफर का नतीजा
चूंकि 'ज़ीरो टेंडर' आए हैं, Avenir Investment का ओपन ऑफर बिना किसी शेयर अधिग्रहण के समाप्त हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, इस ऑफर के कारण Sammaan Capital के पब्लिक शेयरहोल्डिंग पैटर्न या कंट्रोल स्ट्रक्चर में कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा। कंपनी की मौजूदा शेयरधारिता संरचना इस ओपन ऑफर की घटना से अप्रभावित रहेगी।
बनी हुई चिंताएं
इस ओपन ऑफर की पूरी तरह से विफलता को मार्केट का कंपनी या ऑफर की शर्तों में कम भरोसा होने का संकेत माना जा सकता है। अतीत के रेगुलेटरी रिव्यू और सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन, भले ही कंपनी द्वारा स्पष्ट किए गए हों, आगे भी धारणाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
