पूरे साल की कमाई में तगड़ी उछाल
एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस इंडिया लिमिटेड के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर (FY26) काफी शानदार रहा। कंपनी का कुल रेवेन्यू 25.24% बढ़कर ₹2,192.24 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट में 25.52% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹942.94 करोड़ दर्ज किया गया।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी दमदार
पूरे साल के शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ, चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी काफी मजबूत रहे। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 18.66% बढ़कर ₹574.34 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹260.95 करोड़ तक पहुंच गया।
कहां से आ रही है ग्रोथ?
कंपनी की ग्रोथ का मुख्य कारण टियर 2, 3 और 4 शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाना है। यह खास तौर पर उन ग्राहकों पर फोकस करती है जिनकी आय का जरिया अनौपचारिक (informal) है। कंपनी का अपने लोन ओरिजिनेशन, अंडरराइटिंग और कलेक्शन के लिए इन-हाउस मॉडल बनाए रखना एसेट क्वालिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। 31 मार्च 2025 तक, कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹10,865 करोड़ को पार कर गया था।
बढ़ती लागतों का सामना
लगातार ग्रोथ के बावजूद, कंपनी को कुछ वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स पर कंसोलिडेटेड एनुअल इंपेयरमेंट चार्जेस (annual impairment charges) पिछले साल के ₹28.32 करोड़ से 117% बढ़कर ₹61.51 करोड़ हो गए हैं। फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) भी सालाना 19.97% बढ़कर ₹648.45 करोड़ तक पहुंच गई है, जो बढ़ते कर्ज की लागत को दर्शाता है। ऐसे में, कंपनी को अपने प्रोविजन कवरेज रेशियो (Provision Coverage Ratio) को सावधानी से मैनेज करना होगा, जो स्टेज 3 एसेट्स पर 25.50% है।
शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर
कंपनी ने हाल ही में एक अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) का ऐलान किया है। यह निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो कंपनी के मजबूत कैश फ्लो जनरेशन और शेयरधारकों को वैल्यू लौटाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मार्केट में खास पहचान
एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस, LIC Housing Finance और PNB Housing Finance जैसे बड़े प्लेयर्स से हटकर काम करती है। यह Home First Finance Company India Ltd और Aavas Financiers Ltd की तरह ही अफोर्डेबल हाउसिंग (affordable housing) सेगमेंट और कम पहुंच वाले ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करती है।
निवेशकों की नजर इन बातों पर
आगे चलकर, निवेशक कंपनी की बढ़ती फाइनेंस कॉस्ट और इंपेयरमेंट चार्जेस को संभालने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे। एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स (asset quality metrics) जैसे GNPA और NNPA पर भी ध्यान दिया जाएगा, साथ ही ब्रांच नेटवर्क के विस्तार की गति भी महत्वपूर्ण होगी।
