Aptus Value Housing Finance India Ltd. ने अपने निवेशकों और कर्मचारियों के लिए एक अहम घोषणा की है। कंपनी ने 1 अप्रैल 2026 से अपनी सिक्योरिटीज (शेयरों) में ट्रेडिंग विंडो बंद करने का फैसला किया है।
क्यों बंद हुई ट्रेडिंग विंडो?
यह कदम SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत उठाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अप्रकाशित, मूल्य-संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग शेयर ट्रेडिंग में न हो। जब तक कंपनी अपने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों की घोषणा नहीं कर देती, तब तक कंपनी के अंदरूनी लोग और उनके करीबी रिश्तेदार शेयर खरीद या बेच नहीं पाएंगे। यह नियम बाजार में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
कंपनी का कारोबार और रणनीति
Aptus Value Housing Finance मुख्य रूप से दक्षिण भारत के अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में किफायती और मध्यम-आय वर्ग के लिए हाउसिंग फाइनेंस का काम करती है। कंपनी ने हाल ही में ₹7 लाख से कम के लोन के कारोबार से बाहर निकलने और उच्च-टिकट वाले लोन पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति अपनाई है।
Q3 FY26 के नतीजे
कंपनी ने हाल ही में Q3 FY26 (31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें दमदार प्रदर्शन दिखा है:
- कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट: ₹236.19 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही से 23.98% ज्यादा है।
- रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस: ₹553.60 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 23.01% बढ़ा है।
- एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): ₹12,330 करोड़ पर पहुंच गया, जो 21% की सालाना ग्रोथ दर्शाता है।
बाजार में मुकाबले
Aptus Value Housing Finance का मुकाबला LIC Housing Finance, Aavas Financiers और Home First Finance जैसी कंपनियों से है, जो सभी भारत के हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सक्रिय हैं।
आगे क्या देखें?
अब निवेशकों की नजर कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग की तारीख पर रहेगी, जहाँ Q4 और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के ऑडिटेड नतीजे मंजूर किए जाएंगे। नतीजे जारी होने के 48 घंटे बाद ट्रेडिंग विंडो फिर से खोल दी जाएगी। इसके अलावा, कंपनी की रणनीतिक दिशा और AUM ग्रोथ के लक्ष्य भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।