ABS AMC ने रेग्युलेटरी फाइलिंग (regulatory filing) में इस बात की पुष्टि की है। दीपक यादव, जो कंपनी के पैसिव फंड्स (passive funds) के बिज़नेस को लीड कर रहे थे, 17 अप्रैल, 2026 के कारोबार घंटों की समाप्ति से अपना पद छोड़ देंगे। यह पद, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के लिए बेहद अहम है, खासकर भारत में पैसिव फंड सेगमेंट में आ रही ज़बरदस्त ग्रोथ को देखते हुए।
भारतीय निवेशक पैसिव फंड्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह है इन फंड्स में कम लागत (lower costs) और बेहतर डाइवर्सिफिकेशन (diversification) मिलना। इस सेगमेंट में तेज़ी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2025 तक, देश में पैसिव फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹14.20 लाख करोड़ तक पहुँच गया था। यह पिछले साल के मुकाबले 31% की जोरदार बढ़ोतरी दिखाता है। वहीं, पूरे पैसिव म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM 2019 में ₹1.91 लाख करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹12.20 लाख करोड़ हो गया।
Aditya Birla Sun Life AMC (ABS AMC) भारतीय एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम है। हाल के समय में कंपनी में कई सीनियर लीडरशिप (senior leadership) बदलाव देखे गए हैं। जनवरी 2026 में चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (Chief Investment Officer) महेश पाटील (Mahesh Patil) ने कंपनी छोड़ी थी, और मार्च 2026 में अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट (Alternate Investments) डिवीजन में भी कुछ फेरबदल हुए थे। अब पैसिव बिज़नेस के हेड का इस्तीफा कंपनी के लिए एक और महत्वपूर्ण ट्रांज़िशन (transition) है।
भारतीय एसेट मैनेजमेंट बाज़ार बेहद प्रतिस्पर्धी (competitive) है, जहाँ ABS AMC का मुकाबला HDFC AMC और Nippon Life India AMC जैसी बड़ी फर्मों से है। जहाँ HDFC AMC मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) और AUM में आगे है, वहीं ABSL AMC का मार्केट शेयर Nippon Life India AMC के लगभग बराबर है। कम लागत वाले पैसिव ऑप्शंस (passive options) के प्रति बढ़ती निवेशक पसंद सभी एसेट मैनेजर्स के लिए इस सेगमेंट को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। भविष्य में, ABS AMC को पैसिव बिज़नेस के लिए एक नए लीडर की नियुक्ति करनी होगी। उत्तराधिकार (succession) की एक सुचारू प्रक्रिया और रणनीतिक निरंतरता बनाए रखना कंपनी के लिए बेहद ज़रूरी होगा। निवेशक नए लीडर की नियुक्ति और उनके विज़न पर बारीकी से नज़र रखेंगे।