मिस्टर अग्रवाल सितंबर 2019 से Ad-Manum Finance में होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे।
साल 1986 में स्थापित यह कंपनी, जो अग्रवाल ग्रुप (Agarwal Group) का हिस्सा है, कमर्शियल और पैसेंजर व्हीकल फाइनेंसिंग (Vehicle Financing) के साथ-साथ विंडमिल पावर जनरेशन (Windmill Power Generation) जैसे वित्तीय सेवाएं (Financial Services) प्रदान करती है। कंपनी के बोर्ड का औसत कार्यकाल लगभग 2.7 साल का है।
किसी CEO का हटना अक्सर कंपनी की स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन (Strategic Direction) में संभावित बदलावों का संकेत दे सकता है। ऐसे में निवेशक एक स्पष्ट सक्सेशन प्लान (Succession Plan) का इंतजार करेंगे, जिससे बिजनेस में निरंतरता (Business Continuity) बनी रहे और भरोसा कायम रहे। यह पूरी ट्रांजिशन प्रोसेस (Transition Process) बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) की देखरेख में होगी, जो नए CEO की नियुक्ति का मार्गदर्शन करेंगे।
Ad-Manum Finance, भारत के प्रतिस्पर्धी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर में AYEFin, Indifi, और Manappuram Finance जैसे प्लेयर्स के साथ-साथ बैंकों से भी मुकाबला करती है। ये सभी कंपनियां RBI के रेगुलेशन (Regulation) के अधीन काम करती हैं। निवेशक अब नए CEO की नियुक्ति की समय-सीमा, उम्मीदवार की प्रोफाइल और नेतृत्व की ओर से भविष्य की किसी भी रणनीति पर होने वाले कम्युनिकेशन पर बारीकी से नजर रखेंगे। इसके अलावा, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कमेटी के पुनर्गठन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
