AU Small Finance Bank (AU SFB) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले 25.42% बढ़कर ₹2,641.25 करोड़ रहा। वहीं, बैंक की टोटल स्टैंडअलोन इनकम 16.27% की बढ़ोतरी के साथ ₹21,614.28 करोड़ पर पहुँच गई।
FY26 की चौथी तिमाही (Q4) की बात करें तो, बैंक ने ₹5,750.10 करोड़ की टोटल स्टैंडअलोन इनकम पर ₹831.87 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला है। 31 मार्च 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) का रेशियो 2.03% रहा, जो एक साल पहले 2.28% था।
बैंक के बोर्ड ने ₹1 प्रति शेयर (फेस वैल्यू का 10%) का डिविडेंड देने की सिफारिश की है। इसके अलावा, कैपिटल रेज़िंग के लिए बड़े प्रपोजल पर भी वोटिंग होगी।
यूनिवर्सल बैंकिंग की ओर बढ़ा कदम
इस नतीजे के साथ ही, AU SFB ने मार्च 2026 में यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। यह बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इस लाइसेंस के मिलने से AU SFB ज़्यादा फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रोडक्ट्स पेश कर सकेगा, जिससे ग्रोथ को और तेज़ी मिलेगी और मार्केट शेयर बढ़ेगा। मजबूत प्रॉफिट और इनकम ग्रोथ के साथ बेहतर एसेट क्वालिटी, बैंक की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाती है।
यूनिवर्सल बैंकिंग का सफर
AU Small Finance Bank, जिसे 2017 में SFB का लाइसेंस मिला था, लंबे समय से यूनिवर्सल बैंक बनने का लक्ष्य रखता आया है। बैंक को अगस्त 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से लाइसेंस के लिए अप्लाई करने की इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिली थी। मार्च 2026 में RBI ने लाइसेंस से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव किए, जिसमें यह बताया गया कि नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी (NOFHC) का नियम केवल भविष्य की ग्रुप एंटिटीज़ पर लागू होगा।
इससे पहले, बैंक ने FY23 में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के ज़रिए ₹5,000 करोड़ जुटाकर अपनी कैपिटल बेस को मजबूत किया था। बैंक ने FY24 में शेयर्स के ज़रिए ₹5,000 करोड़ और डेट के ज़रिए ₹3,000 करोड़ जुटाने की योजना भी बनाई थी।
शेयरहोल्डर्स के लिए क्या हैं मायने?
यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस मिलने पर शेयरहोल्डर्स को बढ़ी हुई प्रोडक्ट रेंज और मार्केट रीच का फायदा मिल सकता है। प्रपोज्ड फंड रेज़िंग से विस्तार योजनाओं के लिए कैपिटल मिलेगी। बेहतर एसेट क्वालिटी मजबूत रिस्क मैनेजमेंट का संकेत देती है, जो स्टेबल अर्निंग्स की ओर ले जा सकती है। डिविडेंड का ऐलान मैनेजमेंट के भरोसे को दर्शाता है।
निवेशक लाइसेंस एप्लिकेशन के टाइमलाइन और नतीजे पर बारीकी से नज़र रखेंगे। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) और बरोइंग्स को मैनेज करने की क्षमता अहम होगी। फंड रेज़िंग का सफल एग्जीक्यूशन भी ज़रूरी होगा।
मुख्य जोखिम और चिंताएं
फरवरी 2026 में, AU SFB के शेयर में गिरावट देखी गई थी, जब हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी कारोबार के लिए बैंक को डी-एम्पेनल कर दिया था। हालांकि बैंक का कहना है कि इससे कोई बड़ा फाइनेंशियल इम्पैक्ट नहीं होगा, लेकिन यह रेगुलेटरी स्क्रूटनी और ट्रस्ट कंसर्न की ओर इशारा करता है।
31 मार्च 2026 तक कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) घटकर 18.68% रह गया, जो पिछले साल 20.06% था। इसे रेगुलेटरी मिनिमम से ऊपर बनाए रखना ज़रूरी है। बैंक की बरोइंग्स 18.97% बढ़कर ₹13,871.54 करोड़ हो गई है, जिसका प्रभावी प्रबंधन ज़रूरी है।
पीयर्स से तुलना
AU SFB के मुख्य प्रतिस्पर्धियों में Ujjivan Small Finance Bank और Equitas Small Finance Bank शामिल हैं। Bandhan Bank, जिसने NBFC-MFI से यूनिवर्सल बैंक में सफल ट्रांज़िशन किया है, AU SFB के लिए एक तुलनात्मक उदाहरण है। 2.03% के ग्रॉस एनपीए (FY26) के साथ, AU SFB की एसेट क्वालिटी Equitas SFB के 2.78% (FY23) और Bandhan Bank के 5.33% (FY23) की तुलना में बेहतर दिखती है।
