SEBI (प्रोहिबिशन ऑफ इनसाइडर ट्रेडिंग) रेगुलेशंस, 2015 के तहत, Hira Automobiles Limited ने यह फैसला लिया है। इस 'ब्लैकआउट पीरियड' या ट्रेडिंग विंडो क्लोजर का मुख्य उद्देश्य कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजों के सार्वजनिक होने से पहले किसी भी तरह के इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना है।
यह कदम सुनिश्चित करता है कि सभी निवेशकों को एक समान अवसर मिले और किसी भी तरह की अनपब्लिश्ड प्राइस-सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) का गलत इस्तेमाल न हो। इस दौरान, कंपनी के डायरेक्टर्स, ऑफिसर्स और उनके करीबी रिश्तेदारों को Hira Automobiles के शेयरों की खरीद-बिक्री करने की मनाही होगी। वहीं, वे शेयरधारक जो 'डेजिग्नेटेड पर्सन' या 'कनेक्टेड पर्सन' की श्रेणी में नहीं आते, वे बाज़ार में अपने शेयर बेच या खरीद सकते हैं।
Hira Automobiles Limited, जिसकी स्थापना 1989 में हुई थी, मुख्य रूप से Maruti Suzuki India Limited के लिए एक अधिकृत डीलर के तौर पर काम करती है। कंपनी सेल्स, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और एक्सेसरीज के साथ-साथ पुरानी कारों की बिक्री, बीमा और फाइनेंसिंग का भी कारोबार करती है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी का पिछला रिकॉर्ड नियामक जांचों से अछूता नहीं रहा है। SEBI ने कुछ साल पहले कंपनी पर ₹14 लाख का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना तिमाही कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने में 10 साल की देरी और मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नॉर्म्स का पालन न करने के कारण लगाया गया था। SEBI ने 2013 में प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स पर सिक्योरिटीज ट्रेडिंग पर रोक के लिए अंतरिम आदेश भी जारी किए थे।
निवेशक अब उत्सुकता से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग की तारीख का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इन नतीजों से कंपनी के प्रदर्शन का अंदाजा लगेगा। वहीं, ऑटो डीलरशिप सेक्टर में Competent Automobiles Company Ltd., Popular Vehicles & Services, CarTrade और CarDekho जैसी कंपनियों के प्रदर्शन से भी Hira Automobiles के भविष्य की रणनीति पर नजर रखी जाएगी।
