FY26 के लिए Mukka Proteins के नतीजे सामने आ गए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 44.02% बढ़कर ₹1,449.45 करोड़ हो गया। वहीं, नेट प्रॉफिट 18.69% बढ़कर ₹57.09 करोड़ पर पहुंचा।
हालांकि, चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। इस तिमाही में रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 0.25% घटकर ₹380.60 करोड़ रहा। प्रॉफिट ₹21.36 करोड़ पर स्थिर रहा।
स्टैंडअलोन बेसिस पर, पूरे साल के लिए रेवेन्यू 38.62% बढ़कर ₹1,229.21 करोड़ रहा। लेकिन, स्टैंडअलोन प्रॉफिट में सिर्फ 1.75% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹42.41 करोड़ रहा। इससे पता चलता है कि स्टैंडअलोन ऑपरेशन में खर्च रेवेन्यू से ज्यादा तेजी से बढ़े।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता बढ़ता कर्ज है। कंसॉलिडेटेड करंट बोरिंग FY25 में ₹447.76 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹735.67 करोड़ हो गई है। चिंता की बात यह है कि ₹735.67 करोड़ का यह शॉर्ट-टर्म डेट, कंपनी की कुल नेट वर्थ ₹528.78 करोड़ से काफी ज्यादा है। इतना ज्यादा कर्ज कंपनी के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल रिस्क पैदा करता है।
इन फाइनेंशियल दबावों के बावजूद, Mukka Proteins अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी ने विदेश में विस्तार की योजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिसमें एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) स्थापित करना और श्रीलंका की एक कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना शामिल है। ये कदम घरेलू बाजार से बाहर निकलने की कंपनी की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाते हैं।
कंपनी ने मार्च 2024 में अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) किया था। IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने जैसे विस्तार प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाना था।
अपने साथियों की तुलना में, Mukka Proteins का FY26 प्रदर्शन ध्यान खींचने वाला है। एक्वाकल्चर और फीड सेक्टर की अन्य कंपनियाँ जैसे Avanti Feeds Ltd और Waterbase Ltd ने FY24 में रेवेन्यू में गिरावट देखी थी।
पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के मुख्य वित्तीय आंकड़े देखें तो कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹1,006.42 करोड़ और कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट ₹48.10 करोड़ था। स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹886.74 करोड़ और स्टैंडअलोन प्रॉफिट लगभग ₹41.68 करोड़ था।
अब निवेशकों की नजरें कुछ अहम बातों पर रहेंगी। मैनेजमेंट की कर्ज कम करने और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) को सुधारने की स्ट्रैटेजी महत्वपूर्ण होगी। श्रीलंका स्थित नई विदेशी इकाई और ज्वाइंट वेंचर के प्रदर्शन पर भी नजरें रहेंगी। बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के बीच स्टैंडअलोन प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना और कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौतियां हैं। कंपनी द्वारा घोषित ₹75 करोड़ की फंड जुटाने की पहल पर भी ध्यान रहेगा।