Megastar Foods Ltd. ने रूपनगर मार्केट कमेटी (Rupnagar Market Committee) से मिले ₹731.38 करोड़ के एक बड़े फीस नोटिस को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि यह नोटिस गलत है क्योंकि उनके पास 2030 तक का वैध एग्रीकल्चरल लाइसेंस (Agricultural License) है, जो उन्हें इन शुल्कों से छूट देता है।
कंपनी ने 13 अप्रैल, 2026 को फाइलिंग में बताया कि उन्हें 9 अप्रैल, 2026 को यह नोटिस मिला है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने मार्केट कमेटी फीस और रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) का भुगतान नहीं किया है। दोनों मदों में ₹365.69 करोड़ की राशि बताई गई है, जिससे कुल मांग ₹731.38 करोड़ हो जाती है।
यह एक बहुत बड़ी राशि है और अगर कंपनी की दलीलें नहीं मानी गईं तो यह उसके लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकती है। यह पंजाब में एग्रीकल्चरल लेनदेन पर लगने वाले शुल्कों को लेकर एक संभावित विवाद को दर्शाता है।
पंजाब में, मार्केट कमेटी एग्रीकल्चरल ट्रेड की देखरेख करती हैं और राज्य के एग्रीकल्चरल मार्केट एक्ट के तहत फीस वसूलती हैं। रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अक्सर वसूले जाते हैं। Megastar Foods का एग्रीकल्चरल लाइसेंस 31 मार्च, 2030 तक वैध है।
Megastar Foods अब पंजाब स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (Mandi Board) के साथ इस मामले पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रही है और नोटिस का विरोध करने के लिए सभी कानूनी रास्ते तलाश रही है। कंपनी का मुख्य बचाव उसके मौजूदा लाइसेंस पर आधारित है, जो उसे इन विशेष शुल्कों से मुक्त करता है।
Megastar Foods के लिए मुख्य जोखिम यह है कि मार्केट कमेटी का फैसला उनके खिलाफ आ सकता है, जिससे ₹731.38 करोड़ की देनदारी लागू हो सकती है और आगे चलकर अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है।
एग्रो-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनियां, जैसे Dalmia Bharat Sugar and Industries, Balrampur Chini Mills, और Dhampur Sugar Mills, भारत में इसी तरह के राज्य-स्तरीय एग्रीकल्चरल रेगुलेशन और शुल्कों से निपटती हैं।
इस विवाद के मुख्य बिंदु:
- कथित मार्केट कमेटी फीस: ₹365.69 करोड़
- कथित RDF फीस: ₹365.69 करोड़
- एग्रीकल्चरल लाइसेंस की वैधता: 31 मार्च, 2030 तक।
आगे, बाजार की नजरें मंडी बोर्ड के साथ चल रही बातचीत, मार्केट कमेटी के फैसले और Megastar Foods की ओर से किसी भी कानूनी प्रतिक्रिया पर टिकी रहेंगी।
