क्यों बढ़ा कंपनी का घाटा?
JK Agri Genetics के नतीजे बताते हैं कि कंपनी अभी मुश्किलों से गुजर रही है। चौथी तिमाही में रेवेन्यू में आई 20.25% की गिरावट ने घाटे को और बढ़ा दिया है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹29.65 करोड़ था, जो इस साल घटकर ₹23.65 करोड़ रह गया।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए भी तस्वीर कुछ खास अच्छी नहीं है। कंपनी की स्टैंडअलोन टोटल इनकम पिछले साल के ₹166.89 करोड़ से मामूली घटकर ₹164.61 करोड़ रही। वहीं, एनुअल नेट लॉस पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹2.60 करोड़ से बढ़कर ₹7.17 करोड़ हो गया है, यानी घाटा दोगुना से भी ज्यादा हो गया है।
कर्ज़ घटा, पर कानूनी झमेले बरकरार
कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी ने अपना ₹2.00 करोड़ का करंट बोरिंग (Current Borrowings) खत्म कर दिया है और इसे शून्य पर ला दिया है।
हालांकि, कंपनी के सामने बड़ी कानूनी चुनौतियां खड़ी हैं। राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन (Rajasthan State Seeds Corporation) से ₹18.24 करोड़ की ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) अभी भी अटकी हुई हैं और इस पर कानूनी विवाद चल रहा है। इस पैसे की वसूली कंपनी के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
अन्य वित्तीय मुद्दे
इस बार के नतीजों पर कुछ एकमुश्त खर्चों (Exceptional Costs) का भी असर पड़ा है। कंपनी को मैट क्रेडिट एंटाइटलमेंट्स (MAT Credit Entitlements) को ₹5.21 करोड़ राइट-ऑफ (Write-off) करना पड़ा है। इसके अलावा, रिटायरल ऑब्लिगेशन्स (Retiral Obligations) से जुड़े खर्चों ने भी अल्पकालिक मुनाफे को प्रभावित किया है।
