नई पार्टनरशिप से डिफेंस सेक्टर में Paras Defence की एंट्री
MUMBAI: Paras Defence and Space Technologies Ltd (PARAS) शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से ही अपनी विस्तारवादी रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में कंपनी ने Complus Systems Pvt. Ltd. और JV Micronics के साथ मिलकर एक नई राह पकड़ी है। इन कंपनियों के साथ हुए समझौता (MoU) के तहत, PARAS अब Anechoic और Semi-Anechoic Chambers के निर्माण और सर्विसिंग के कारोबार में उतरेगा, जो डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
क्या है इस डील की अहमियत?
यह साझेदारी PARAS के लिए एक नए और खास बिजनेस वर्टिकल (Business Vertical) की शुरुआत है। कंपनी इस कंसोर्टियम (Consortium) को लीड करेगी और अपने पार्टनर की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए भारत के साथ-साथ दुनिया भर में अवसरों की तलाश करेगी। इस कदम से कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में विविधता आएगी और डिफेंस इंजीनियरिंग व एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग (Advanced Manufacturing) में इसकी मौजूदा काबिलियत का भी विस्तार होगा।
कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी
Paras Defence अपनी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए लगातार नए क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है। हाल ही में कंपनी ने सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (Semiconductor Packaging) के लिए एक सब्सिडियरी (Subsidiary) भी बनाई थी। अब इस नई पार्टनरशिप के साथ, कंपनी हाई-टेक डिफेंस सॉल्यूशंस (High-Tech Defense Solutions) में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
शेयरहोल्डर्स के लिए क्या है खास?
इस नई डील से शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को एक नए और स्पेशलाइज्ड डिफेंस सेक्टर (Specialized Defense Sector) में निवेश का मौका मिलेगा। इससे कंपनी के लिए नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स (Revenue Streams) खुलने की उम्मीद है। साथ ही, Paras Defence अब डिफेंस और एयरोस्पेस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Testing Infrastructure) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने की ओर अग्रसर है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
Paras Defence ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के अंत तक ₹373 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। कंपनी की 1-वर्षीय रेवेन्यू CAGR (Compound Annual Growth Rate) 42% और EBITDA CAGR 77% रही है। कंपनी के पास CRISIL की ओर से A-/Stable की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग और A2+ की शॉर्ट-टर्म क्रेडिट रेटिंग भी है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों की नजर अब इस नई पार्टनरशिप के जरिए मिलने वाले प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर्स पर होगी। साथ ही, इस नए बिजनेस वर्टिकल से कंपनी के रेवेन्यू में कितनी बढ़ोतरी होती है, इस पर भी सबकी निगाहें रहेंगी।
