प्याज की महंगाई पर सरकार का वार: ₹35/किलो बिकेगा, मंडियों में 'कंडा एक्सप्रेस' दौड़ी

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AuthorKabir Saluja|Published at:
प्याज की महंगाई पर सरकार का वार: ₹35/किलो बिकेगा, मंडियों में 'कंडा एक्सप्रेस' दौड़ी

प्याज के दाम **59%** तक चढ़ने के बाद, भारत सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए **₹35** प्रति किलो पर सब्सिडी वाला प्याज बेचना शुरू कर दिया है। NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के ज़रिये ये बिक्री हो रही है, जबकि 'कंडा एक्सप्रेस' रेल नेटवर्क बड़े शहरों में सप्लाई बढ़ा रहा है।

प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले साल के मुकाबले प्याज के दामों में 59% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते सरकार ने अब ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज बेचने का फैसला किया है। यह पहल उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए की गई है।

इस सब्सिडी वाले प्याज की बिक्री का जिम्मा नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED), नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) और केंद्रीय भंडार (Kendriya Bhandar) को सौंपा गया है।

'कंडा एक्सप्रेस' सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है

उत्पादन क्षेत्रों से बड़े शहरों तक प्याज की सप्लाई को आसान बनाने के लिए सरकार 'कंडा एक्सप्रेस' नाम की एक विशेष रेल सेवा का इस्तेमाल कर रही है। यह ट्रेन सेवा नासिक जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक इलाकों से दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे बड़े खपत वाले शहरों तक बल्क स्टॉक पहुंचा रही है। सरकार फिलहाल अपने पास मौजूद लगभग 1.21 लाख टन के प्याज बफर स्टॉक का इस्तेमाल कर रही है ताकि बाजार में कमी को पूरा किया जा सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके।

महंगाई का कारण और आगे की राह

बाजार के जानकारों का मानना है कि प्याज की कीमतों में यह उछाल मौसमी कारणों, त्योहारी मांग और सप्लाई चेन में आई रुकावटों का नतीजा है। खाने-पीने की चीजों में लगातार बनी हुई महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता है, क्योंकि यह लोगों की खर्च करने की क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है और खुदरा महंगाई दर को भी बढ़ाती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपनी मॉनेटरी पॉलिसी तय करते समय खुदरा महंगाई दर पर बारीकी से नजर रखता है।

हालांकि, यह सरकारी हस्तक्षेप तत्काल राहत प्रदान करने के लिए है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि रिटेल बाजारों में प्याज की लगातार उपलब्धता बनी रहे। अगस्त-सितंबर का महीना त्योहारी सीजन और मौसम की मार के कारण प्याज की सप्लाई के लिए ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में, सरकार के इस कदम से यह पता चलता है कि वह कैसे त्योहारी मांग और सप्लाई की कमी से जूझते हुए प्याज की महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, बिना बाजार के संतुलन को बिगाड़े।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.