SFIO (Serious Fraud Investigation Office) ने IndusInd Bank के मामले में अपनी जांच और तेज कर दी है। अब यह एजेंसी बैंक के प्रमुख ऑडिट फर्मों, जैसे S R Batliboi & Co (EY) और MSKA & Associates (BDO) से सीधे सवाल-जवाब कर रही है। ये फर्म सालों से बैंक से जुड़ी हुई हैं।
पूछताछ का मुख्य कारण बैंक के डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (Derivatives Trading) में कथित अनियमितताएं हैं, जिसके कारण लगभग ₹2,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है। यह जांच कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) द्वारा शुरू की गई थी और इसमें कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और अकाउंटिंग (Accounting) से जुड़े संभावित धोखाधड़ी वाले मुद्दों की जांच की जा रही है।
19 अप्रैल 2026 तक लगभग ₹851.95 पर ट्रेड कर रहे IndusInd Bank के शेयर मार्च 2025 में मामला सामने आने के बाद से ही दबाव में हैं, जिससे इसके बाजार मूल्य (Market Value) में काफी गिरावट आई है। बैंक की मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹66,442.20 करोड़ है। इसका P/E रेश्यो -36.21 है, जो HDFC Bank (P/E ~17.85), ICICI Bank (P/E ~17.05), और Axis Bank (P/E ~15.96) जैसे बड़े बैंकों के मुकाबले काफी कम है। यह अंतर बाजार द्वारा IndusInd Bank को उसकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए कम वैल्यूएशन देने को दर्शाता है।
डेरिवेटिव्स से जुड़े इन मुद्दों के कारण बैंक को एक बारगी ₹2,000 करोड़ का घाटा हुआ था, जिसके चलते बैंक के CEO और डिप्टी CEO ने इस्तीफा भी दे दिया था। भारतीय बैंकिंग में अतीत में भी ऐसी अकाउंटिंग समस्याओं के कारण लंबी जांचें, निवेशकों का भरोसा कम होना और शेयर की कीमतों पर लंबे समय तक असर देखा गया है।
SFIO की इस जांच में EY और BDO नेटवर्क के सहयोगियों जैसे प्रमुख ऑडिट फर्मों की भागीदारी, ऑडिटर की स्वतंत्रता (Auditor Independence) और वैधानिक ऑडिट (Statutory Audits) की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐतिहासिक रूप से, ऑडिट फर्मों को वित्तीय धोखाधड़ी का पता लगाने में विफल रहने पर भारी जुर्माना और परिचालन बंद होने जैसी गंभीर सजाओं का सामना करना पड़ा है।
SFIO, धोखाधड़ी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 के तहत परिभाषित करने के लिए ADT-4 फॉर्म, फोरेंसिक रिपोर्ट (Forensic Reports) और आंतरिक ऑडिट निष्कर्षों (Internal Audit Findings) की समीक्षा कर रहा है। बैंक द्वारा जून 2025 में SFIO को डेरिवेटिव अकाउंटिंग, अनवेरिफाइड बैलेंस (Unverified Balances) और माइक्रोफाइनेंस आय (Microfinance Income) के बारे में दी गई जानकारी इस जांच के व्यापक दायरे को उजागर करती है। इससे पहले, Moody's Ratings ने बैंक के आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) और प्रबंधन द्वारा पर्याप्त निगरानी (Oversight) की कमी जैसी चिंताओं का हवाला देते हुए, IndusInd Bank के क्रेडिट असेसमेंट की समीक्षा को संभावित डाउनग्रेड के लिए रखा था।
SFIO का बैंक को छोड़कर सीधे व्यक्तियों और फर्मों से पूछताछ करने का यह तरीका, दुर्व्यवहार के सबूत खोजने की एक रणनीति को दर्शाता है, जिससे लंबी कानूनी लड़ाई और प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है। विश्लेषकों (Analysts) का IndusInd Bank के लिए दृष्टिकोण मिश्रित (Mixed) है, जिसमें आम सहमति से मूल्य लक्ष्य (Consensus Price Target) लगभग ₹867.12 है। यह इसके वर्तमान ट्रेडिंग स्तर ₹851.95 से मामूली संभावित वृद्धि का संकेत देता है। हालांकि, इस अनुमान पर वर्तमान SFIO जांच और आगे की नियामक कार्रवाइयों की संभावना को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। जब तक बैंक पारदर्शी सहयोग और मजबूत आंतरिक नियंत्रणों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करता, तब तक यह जांच निवेशकों की भावना (Investor Sentiment) को प्रभावित करती रहेगी।
