रूस द्वारा यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर किए गए घातक हमलों से 12 क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई है। राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy अब नॉर्वे से एयर डिफेंस मदद मांग रहे हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन और एनर्जी प्राइसेज पर नए जोखिम खड़े हो गए हैं।
रूस द्वारा यूक्रेन के बुनियादी ढांचे पर किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। इन हमलों में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 12 क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। हमलों ने न केवल आवासीय इलाकों को प्रभावित किया है, बल्कि प्रमुख लॉजिस्टिक्स सेंटर्स और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
एयर डिफेंस की मांग और कूटनीतिक दबाव
इस संकट से निपटने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने नॉर्वे का दौरा किया है। वहां वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री और फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ एयर डिफेंस सिस्टम, विशेष रूप से Patriot इंटरसेप्टर्स की आपूर्ति पर चर्चा कर रहे हैं। यह कूटनीतिक कोशिश तब हो रही है जब अमेरिका से मिलने वाली सैन्य सहायता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और कीव पर शांति वार्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय शेयर बाजार के लिहाज से यह घटनाक्रम काफी संवेदनशील है। रूस-यूक्रेन संघर्ष का इतिहास रहा है कि यह कच्चे तेल (Crude Oil) और नेचुरल गैस की कीमतों में भारी उछाल का कारण बनता है। इन कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और एनर्जी पर निर्भर रहने वाले सेक्टर्स के मार्जिन पर पड़ता है।
ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और पोर्ट्स में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को अस्थिर कर सकती है, जिससे शिपिंग लागत बढ़ सकती है। जैसे-जैसे ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता बढ़ेगी, उसका सीधा असर वैश्विक महंगाई और औद्योगिक सेंटीमेंट पर देखने को मिल सकता है। आने वाले हफ्तों में कच्चे माल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
