रूस के एक हमले में माइला स्थित वेयरहाउस तबाह हो गया है, जिसमें **38** लोगों की जान चली गई है। जवाबी कार्रवाई में मॉस्को ने यूक्रेन के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे सर्दियों में सप्लाई चेन और ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।
रूस-यूक्रेन के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। कीव के पश्चिम में माइला स्थित एक सुविधा पर हुए रूसी हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। बचाव अभियान अभी भी जारी है, जिसमें 20 लोग घायल हुए हैं और 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह इस साल के सबसे घातक एकल हमलों में से एक है।
एनर्जी सेक्टर में बढ़ा तनाव
रूसी रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन के ड्रोन ऑपरेशंस के जवाब में यूक्रेन के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी की घोषणा की है। यह धमकी हाल ही में रूसी ईंधन सुविधाओं, विशेष रूप से लेनिनग्राद क्षेत्र में Kirishi ऑयल रिफाइनरी और Yeysk सैन्य एयरफील्ड पर हुए ड्रोन हमलों के प्रतिशोध के रूप में देखी जा रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Kirishi रिफाइनरी रूस का प्रमुख हब है, जो देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 6.6% हिस्सा संभालती है। इन महत्वपूर्ण संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों ने रूसी फ्यूल सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। इस स्थिति को देखते हुए, रूस ने घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 30 सितंबर, 2026 तक डीजल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध बढ़ा दिया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर गहराता खतरा
सर्दियों का मौसम करीब आते ही यूक्रेन का बिजली ग्रिड रूस के निशाने पर है। इससे पहले भी ऊर्जा प्रणालियों पर हुए हमलों ने औद्योगिक उत्पादन और आम नागरिकों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया था। पावर नेटवर्क पर 'बड़े हमलों' की नई चेतावनी ने आने वाले महीनों में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है।
क्षेत्र में काम करने वाली लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यवसायों के लिए सप्लाई चेन बाधित होने का बड़ा जोखिम पैदा हो गया है। निवेशक अब बारीकी से नजर रखे हुए हैं कि ये जवाबी उपाय ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस और औद्योगिक ऑपरेशंस की स्थिरता को किस तरह प्रभावित करेंगे।
