US Air Force ने UK के RAF Fairford बेस से अपने B-52 और B-1 बॉम्बर बेड़े को वापस बुला लिया है। यह फैसला एक काउंटर-टेररिज्म जांच के बाद लिया गया है, जिसमें ईरान की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।
सितंबर के अंत में RAF Fairford बेस पर हुई एक सुरक्षा घटना के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। जांच के दौरान 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक भी शामिल है, हालांकि फिलहाल सभी जमानत पर बाहर हैं।
क्या है पूरा मामला?
ब्रिटिश अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस सुरक्षा सेंध में बाहरी ताकतों का हाथ हो सकता है। ब्रिटिश सरकार ने सीधे तौर पर तेहरान की ओर इशारा किया है, हालांकि ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
पेंटागन की अगली चाल
यूके से विमानों की वापसी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अमेरिका पीछे हट रहा है। पेंटागन ने साफ कर दिया है कि उनकी नजर मिडिल ईस्ट पर है। USS Theodore Roosevelt और USS Malkin Island जैसी नौसेना स्ट्राइक ग्रुप्स तेजी से मध्य-पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। अक्टूबर के अंत तक, अमेरिका इस क्षेत्र में 3 कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स तैनात करने की तैयारी कर रहा है।
इस रणनीतिक बदलाव के कारण ग्लोबल मार्केट में हलचल बढ़ सकती है, क्योंकि मिडिल ईस्ट की अस्थिरता का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों और वैश्विक जोखिम (Risk) पर पड़ता है।
