Uzbekistan Trade: अमेरिका की सेंट्रल एशिया में नई चाल, भारतीय कंपनियों और INSTC कॉरिडोर पर क्या होगा असर?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Uzbekistan Trade: अमेरिका की सेंट्रल एशिया में नई चाल, भारतीय कंपनियों और INSTC कॉरिडोर पर क्या होगा असर?

US Secretary of State Marco Rubio ने अक्टूबर में उज्बेकिस्तान के लिए एक बिजनेस डेलिगेशन का ऐलान किया है। भारत के नजरिए से यह रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि यह ग्लोबल सप्लाई चेन और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने नई दिल्ली में आयोजित एंबेसडर रीजनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी फॉरेन पॉलिसी में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। Rubio ने पुष्टि की है कि अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट मिड-अक्टूबर में उज्बेकिस्तान के लिए एक बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भेज रहा है। इस दौरे में 100 से ज्यादा अमेरिकी कॉर्पोरेट्स शामिल होंगे, जिनका मकसद C5+1 डिप्लोमैटिक फ्रेमवर्क के तहत व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देना है।

सेंट्रल एशिया का बढ़ता महत्व

यह कदम सेंट्रल एशिया के प्रति अमेरिकी बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है, जो यूरोप और एशिया के बीच एक ब्रिज का काम करता है। उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान जैसे देश अब एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और मैन्युफैक्चरिंग के बड़े हब के तौर पर उभर रहे हैं। अमेरिका की इस पहल से वहां के उद्योगों में निवेश की प्रतिस्पर्धा और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय बाजार के लिए मायने

सेंट्रल एशिया में फार्मास्यूटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और IT सेक्टर में भारतीय कंपनियों की गहरी दिलचस्पी रही है। भारत का 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) इस क्षेत्र को ईरान के रास्ते भारत से जोड़ता है। हालांकि, अमेरिकी दखल से जहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शिता की उम्मीद है, वहीं भारतीय फर्मों को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अपना रास्ता बनाना होगा।

जोखिम और नजरें

निवेशकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि सेंट्रल एशिया के देश लैंडलॉक्ड हैं और लॉजिस्टिक्स के लिए पूरी तरह पड़ोसी मुल्कों पर निर्भर हैं। रूस-चीन और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार का तनाव व्यापार के लिए बाधा बन सकता है। करेंसी की अस्थिरता और स्लो रेगुलेटरी रिफॉर्म्स भी बड़ी चुनौती हैं। अक्टूबर में ताशकंद दौरे के बाद सामने आने वाले ट्रेड एग्रीमेंट्स पर अब EPC कंपनियों और दवा निर्यातकों की निगाहें टिकी होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.