U.S. Supreme Court ने 3 नवंबर, 2026 के मिड-टर्म चुनावों के लिए मेल-इन वोटिंग (mail-in voting) पर नई पाबंदियां लगाने की कोशिशों को रोक दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। राष्ट्रपति Donald Trump ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है, जिससे प्रशासन और न्यायपालिका के बीच तनाव और गहरा गया है।
कोर्ट का रुख और फैसला
14 सितंबर, 2026 को जारी एक आदेश में U.S. Supreme Court ने मेल-इन बैलट की मौजूदा प्रक्रियाओं को ही बरकरार रखा है। कोर्ट का यह फैसला निचली अदालत के उस शुरुआती आदेश का समर्थन करता है, जिसने U.S. Postal Service को मेल बैलट हैंडलिंग में किसी भी नए बदलाव को लागू करने से रोक दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि चुनाव अधिकारियों के पास वोटिंग प्रक्रिया में बदलाव के लिए अब बहुत कम समय बचा है।
राजनीतिक तनाव और असहमति
फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने कोर्ट पर हमला बोला और इस निर्णय को 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया। कोर्ट के भीतर भी इसे लेकर मतभेद साफ दिखे। जस्टिस Samuel Alito और जस्टिस Clarence Thomas ने बहुमत के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति जताई, जबकि जस्टिस Brett Kavanaugh ने तर्क दिया कि चुनाव के इतने करीब लॉजिस्टिकल बदलाव करना असंभव है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इन्वेस्टर के नजरिए से देखें तो इस मामले का किसी लिस्टेड कंपनी या स्टॉक मार्केट पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता है। यह एक प्रक्रियात्मक (procedural) मुद्दा है, जिसका बिजनेस फंडामेंटल्स से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले ट्रेडर्स के लिए अमेरिकी राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगे चलकर इसका असर ट्रेड पॉलिसी, टैरिफ और फिस्कल स्पेंडिंग पर पड़ सकता है। नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव ही आगे की आर्थिक दिशा तय करेंगे, जिस पर बाजार की बारीकी से नजर बनी रहेगी।
