राष्ट्रपति Donald Trump ने रूसी डीजल के आयात के लिए एक बड़ी डील फाइनल की है। US Treasury ने अप्रैल 2027 तक सैंक्शंस में छूट दे दी है। इस कदम से अमेरिकी ईंधन की कीमतें कम करने का लक्ष्य है, लेकिन इसने कूटनीतिक संकट पैदा कर दिया है क्योंकि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन से रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने की मांग की है।
अमेरिकी सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए ईंधन की कीमतों को स्थिर करने के लिए रूसी डीजल के आयात का सौदा किया है। इस समझौते के तहत, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 7 अप्रैल, 2027 तक रूसी डीजल निर्यात पर प्रतिबंधों में अस्थायी छूट जारी की है। डील के शुरुआती चरण में 3,00,000 टन की खेप आएगी, जिसे भविष्य में 10 लाख टन और अंततः 30 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ईंधन बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करना और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में राहत लाना है।
कूटनीतिक दबाव और विवाद
इस सौदे के साथ ही कीव (Kyiv) पर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ गया है। मियामी में हुई उच्च-स्तरीय चर्चाओं के दौरान, अमेरिकी दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर ने यूक्रेनी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है: यूक्रेन को रूसी तेल रिफाइनरियों पर अपने ड्रोन हमले बंद करने होंगे। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इन हमलों ने वैश्विक स्तर पर डीजल की कमी और कीमतों में उछाल पैदा किया है। हालाँकि, यह कदम यूक्रेनी नेतृत्व के लिए एक कठिन स्थिति पैदा करता है।
ज़ेलेंस्की का विरोध
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मॉस्को के लिए एक 'फाइनेंशियल लाइफलाइन' करार दिया है। इस फैसले के बाद ज़ापोरिज्जिया और कीव जैसे शहरों में रूसी हवाई हमलों में तेजी देखी गई है।
मार्केट पर असर
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह स्थिति जटिल है। जहां एक ओर डीजल की सप्लाई बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस में राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर रूसी रिफाइनरियों को हुए पिछले नुकसान के कारण सप्लाई की निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ऊर्जा-केंद्रित दांव वास्तव में आर्थिक राहत देता है या इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ती है।
