US Secretary of State Marco Rubio ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने का समर्थन किया है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय अस्थिरता को नियंत्रित करने और भारत की सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है। निवेशकों के लिए दक्षिण एशिया में जारी भू-राजनीतिक स्थिरता बाजार के भरोसे के लिहाज से एक महत्वपूर्ण फैक्टर है।
कूटनीति में एक बड़ा बदलाव
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस्लामाबाद के साथ संबंधों को लेकर एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया है। उन्होंने साफ किया है कि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और वहां के परमाणु हथियारों को देखते हुए लगातार कूटनीतिक बातचीत जारी रखना जरूरी है, चाहे अतीत में मतभेद रहे हों। Rubio का मानना है कि यह भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए कोई खतरा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में अस्थिरता को कम करने का एक तरीका है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
बाजार के जानकारों के लिए यह बयान काफी महत्वपूर्ण है। जब भी पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम होता है, तो इसका सकारात्मक असर भारतीय इक्विटी बाजारों और डिफेंस सेक्टर पर पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से सीमा पार का तनाव मार्केट में अस्थिरता लाता रहा है, इसलिए अमेरिकी विदेश मंत्री के इस रुख को एक 'रिस्क मिटिगेशन' रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
नीति में बदलाव का इशारा
दिलचस्प बात यह है कि एक सीनेटर के रूप में Rubio अक्सर पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता पर कड़ी शर्तें लगाने की वकालत करते थे। लेकिन अब शीर्ष राजनयिक के रूप में उनका यह कहना कि इस्लामाबाद को अलग-थलग करने के बजाय उसे राजनयिक दायरे में रखना ज्यादा प्रभावी है, अमेरिकी विदेश नीति में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।
अमेरिकी प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ उसकी साझेदारी सर्वोपरि है और किसी अन्य देश के साथ संबंध इस गठबंधन को कमजोर नहीं करेंगे। हालांकि, आने वाले समय में ये नीतिगत संकेत किस तरह जमीन पर उतरते हैं, इस पर निवेशकों की कड़ी नजर बनी रहेगी।
