US Treasury ने ईरान की मिलिट्री को हथियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क को तोड़ने के लिए ईरान, हांगकांग और पाकिस्तान की **10** संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कदम तब उठाया गया है जब ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
प्रोक्योरमेंट नेटवर्क पर सीधी चोट
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े उन नेटवर्क को टारगेट किया है, जो मिलिट्री इक्विपमेंट की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) के तहत इन 10 इकाइयों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, ताकि मिसाइल और ड्रोन बनाने के लिए जरूरी पुर्जों की सप्लाई को रोका जा सके। अमेरिका की कोशिश उन बिचौलियों को दंडित करने की है जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का फायदा उठाकर ट्रेड रिस्ट्रिक्शंस को दरकिनार करते हैं।
गिरती मुद्रा और आर्थिक अस्थिरता
ईरान की अर्थव्यवस्था इस वक्त गहरे संकट में है। ईरानी रियाल 25 लाख प्रति डॉलर के स्तर के पार जाकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। साल भर से जारी इस करेंसी डीवैल्यूएशन और इंटरनेशनल सेंक्शन्स के कारण वहां का फिस्कल सिस्टम बुरी तरह दबाव में है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक (Oil Producer) देश है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है। इसके अलावा, हांगकांग जैसे फाइनेंशियल हब की कंपनियों पर बैन लगने से मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशंस के लिए 'कंप्लायंस रिस्क' बढ़ गया है। कंपनियों को अब अपनी सप्लाई चेन की बारीकी से जांच करनी होगी ताकि वे अनजाने में किसी सेकेंडरी सेंक्शन की चपेट में न आ जाएं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि इन प्रतिबंधों का ईरान की लॉजिस्टिक्स क्षमता पर कितना असर पड़ता है और इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर क्या होगा।
