ईरान के तेल नेटवर्क पर अमेरिका का शिकंजा
अमेरिकी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के तेल नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 12 ऐसे व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जो कथित तौर पर चीन को ईरान से तेल की अवैध शिपमेंट में शामिल थे। इस कार्रवाई का मुख्य मकसद ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए फंडिंग के रास्ते बंद करना है। ट्रेजरी विभाग ने इन फंडिंग नेटवर्क को बाधित करने वाली जानकारी देने के लिए 15 मिलियन डॉलर तक के इनाम की भी घोषणा की है।
चालाक चालें और चीन पर बढ़ता दबाव
अधिकारियों ने बताया कि ये प्रतिबंधित कंपनियां फ्रंट कंपनी (front companies) के तौर पर काम कर रही थीं। ये जहाजों की व्यवस्था करती थीं, कार्गो का प्रबंधन करती थीं और 'शैडो फ्लीट' (shadow fleet) के जरिए लाखों बैरल ईरानी तेल बेचती थीं। ये नेटवर्क शेल कंपनियों (shell companies) और जहाजों के बीच तेल ट्रांसफर (ship-to-ship transfers) जैसी चालाकियों का इस्तेमाल करते थे ताकि तेल के स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके। इसी कड़ी में, अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन की तीन सैटेलाइट कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरान के सैन्य अभियानों में मदद कर रही थीं। यह चीन पर व्यापक दबाव का संकेत है, जिससे वाशिंगटन बीजिंग को जवाबदेह ठहराना चाहता है।
प्रतिबंधों की असलियत और बाजार का जोखिम
सवाल यह उठता है कि क्या ये प्रतिबंध इतने मजबूत नेटवर्क पर असर डाल पाएंगे? ईरान अक्सर छिपकर तेल बेचने के तरीकों और जटिल वित्तीय सौदों के जरिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देता रहा है, जिसमें चीन मुख्य खरीदार रहा है। चीन के लिए रियायती ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने की चाहत इन प्रतिबंधों के असर को कम कर सकती है। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक तेल कीमतों के लिए भी बड़ा खतरा है, जो ऐतिहासिक रूप से $100 प्रति बैरल के पार जा चुका है।
बाजार की प्रतिक्रिया और भविष्य की तनातनी
आगे चलकर ईरान के तेल व्यापार और चीन के अमेरिकी प्रतिबंधों के अनुपालन पर पैनी नजर रहेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम मुलाकात में वाशिंगटन बीजिंग से सहयोग की उम्मीद करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिबंध ईरान के तेल निर्यात को बाधित तो कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं पाएंगे, खासकर चीन जैसे बड़े खरीदार की मौजूदगी में। बाजार के जानकार आने वाले दिनों में अस्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं, और ईरान या चीन की तरफ से किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से कीमतें और बढ़ सकती हैं।
