US Tariffs पर बड़ा फेरबदल! कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार ने लगाया नया सरचार्ज, विदेशी निवेश पर बढ़ी निगरानी

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AuthorMehul Desai|Published at:
US Tariffs पर बड़ा फेरबदल! कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार ने लगाया नया सरचार्ज, विदेशी निवेश पर बढ़ी निगरानी
Overview

अमेरिका के व्यापार (Trade) और निवेश (Investment) की दुनिया में बड़ा उलटफेर हुआ है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके जवाब में, अमेरिकी सरकार ने तुरंत एक नया सेक्शन 122 (Section 122) इंपोर्ट सरचार्ज लागू कर दिया है और CFIUS के जरिए विदेशी निवेश पर अपनी निगरानी को और भी तेज कर दिया है।

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IEEPA टैरिफ रद्द, लगा नया सरचार्ज

20 फरवरी, 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'लर्निंग रिसोर्सेज इंक. बनाम ट्रंप' मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कर दिया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को इंपोर्ट पर टैरिफ (Tariffs) लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते, जनवरी 2025 से लागू सभी IEEPA-आधारित टैरिफ को अमान्य कर दिया गया है। 24 फरवरी, 2026 से इन टैरिफ की वसूली रोक दी गई है। इस फैसले से उन कंपनियों को अरबों डॉलर की रिफंड (Refund) मिल सकती है, जिन्होंने ये टैरिफ भरे थे, हालांकि इसके लिए उन्हें कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आवेदन करना होगा।

इस अचानक हुए बदलाव पर अमेरिकी प्रशासन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 (Section 122) का सहारा लिया है और एक अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लागू किया है। शुरुआत में यह सरचार्ज 10% था, जिसे 24 फरवरी, 2026 से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है और यह 150 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। इसका मकसद बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स (Balance-of-Payments) की समस्याओं को दूर करना है, जबकि सरकार अपनी आगे की रणनीति पर विचार कर रही है। इसके अलावा, सेक्शन 232 (Section 232) और सेक्शन 301 (Section 301) जैसे पुराने और मजबूत टूल अभी भी मौजूद हैं।

पुराने ट्रेड टूल्स एक्टिव, नई जांचें शुरू

सेक्शन 232 को राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के मामलों में न्यायिक समर्थन मिलने के कारण एक टिकाऊ टूल माना जाता है। वहीं, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत नई जांचें भी शुरू कर दी हैं। ये जांचें 16 देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) को निशाना बना रही हैं। इससे साफ है कि सरकार व्यापार नियमों को सख्ती से लागू करने के अपने रुख पर कायम है।

विदेशी निवेश पर CFIUS की पैनी नजर

टैरिफ के अलावा, कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (CFIUS) विदेशी निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण गेटकीपर बनी हुई है। यह आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ती है। CFIUS की समीक्षाएं काफी विस्तृत होती हैं और ये किसी भी गैर-अमेरिकी निवेशक पर लागू होती हैं, जिसका लेनदेन अमेरिकी कंपनियों, खासकर सेमीकंडक्टर (Semiconductors), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर (Critical Infrastructure) जैसे क्षेत्रों में हो। 'अमेरिका फर्स्ट इन्वेस्टमेंट पॉलिसी' (America First Investment Policy) के तहत महत्वपूर्ण सेक्टरों में अमेरिकी कंपनियों की सुरक्षा और सप्लाई चेन (Supply Chain) की मजबूती को प्राथमिकता दी जा रही है।

हालांकि अमेरिका आम तौर पर एक खुला निवेश माहौल बनाए रखता है, और भारत जैसे सहयोगी देशों के निवेशक अक्सर समीक्षाओं को आसानी से पार कर लेते हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को अब हर डील में गहराई से शामिल किया जा रहा है। 2024 में CFIUS फाइलिंग में मामूली कमी आई थी, 325 लेनदेन की समीक्षा हुई, जो 2023 की तुलना में कम है, लेकिन क्लीयरेंस की दर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर रही। उल्लंघनों के लिए जुर्माने में खासी वृद्धि देखी गई है। विदेशी खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे इन जोखिमों से बचने और अपने लेनदेन को ठीक से स्ट्रक्चर करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें।

बदलता व्यापार परिदृश्य: सुरक्षा और वाणिज्य का संगम

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई अमेरिकी व्यापार नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। अमेरिका अब व्यापार नीति को औद्योगिक नीति, सप्लाई चेन की मजबूती और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ और गहराई से जोड़ रहा है। इसे 'सिक्योरिटी-कंडीशन्ड ट्रेड' (Security-conditioned trade) भी कहा जा रहा है, जिसका मतलब है कि अमेरिका सक्रिय रूप से वैश्विक वाणिज्य में अपनी भागीदारी को नया आकार दे रहा है।

नीतिगत बदलावों और बाजार पर असर को समझना

सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसे जटिल कानूनी ढांचों पर निर्भरता, और अस्थायी सेक्शन 122 सरचार्ज, अनिश्चितता का माहौल पैदा करते हैं। इनগুলোর लिए अक्सर औपचारिक जांच की जरूरत होती है और ये कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं, जिससे प्रभावित उद्योगों के लिए लंबे समय तक अस्पष्टता बनी रह सकती है। ऐतिहासिक रूप से, व्यापार तनाव का सीधे शेयर बाजार के वैल्यूएशन (Valuation) पर असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के दौरान प्रमुख बाजारों में बड़ी गिरावट देखी गई थी, और अप्रैल 2025 में टैरिफ की घोषणाओं ने बाजार में भारी गिरावट और खरबों डॉलर के नुकसान का कारण बनी थी।

IEEPA टैरिफ को सेक्शन 122 सरचार्ज से बदलने से अलग-अलग उद्योगों पर लागत का प्रभाव बदल सकता है। कुछ सेक्टर, जैसे कपड़ा (Apparel), पर कम असर दिखेगा, जबकि ऑटोमोबाइल (Automobiles) और प्राइमरी मेटल (Primary Metals) जैसे सेक्टरों पर अलग प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन द्वारा सेक्शन 301 जांचों का सक्रिय उपयोग व्यापार टूल्स के निरंतर रणनीतिक उपयोग को उजागर करता है। टैरिफ रिफंड पर स्पष्ट मार्गदर्शन की कमी और व्यापार कानूनों की बदलती व्याख्याओं की संभावना के कारण व्यवसायों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार नई वास्तविकताओं के अनुसार ढल रहा है

अमेरिकी व्यापार नीति का माहौल IEEPA के तहत व्यापक, कार्यकारी-संचालित टैरिफ लगाने से हटकर, मौजूदा वैधानिक शक्तियों और बढ़ी हुई निवेश स्क्रीनिंग के अधिक खंडित दृष्टिकोण की ओर बढ़ गया है। कई अर्थव्यवस्थाओं में अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सेक्शन 301 जांचों का शुरू होना, कथित अनुचित व्यापार प्रथाओं को संबोधित करने और घरेलू उद्योगों का समर्थन करने के निरंतर प्रयास को दर्शाता है। हालांकि सेक्शन 122 टैरिफ अस्थायी हैं, सेक्शन 232 और 301 की मजबूती यह बताती है कि व्यापार बाधाएं अमेरिकी आर्थिक नीति का हिस्सा बनी रहेंगी।

अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों, विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए, इन विकसित होते नियामक ढांचों के अनुकूल ढलना महत्वपूर्ण है। इसमें अमेरिकी बाजार तक निरंतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कठोर CFIUS अनुपालन शामिल है। व्यवसायों को इन जटिल नीतिगत बदलावों से निपटने के लिए लचीलेपन (Agility) और सक्रिय जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.